पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 100, 200, 300, 500 और 1000 शब्दों में | Essay on Pollution in Hindi

आज हम पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध लेकर आये हैं। यह प्रदूषण पर निबंध बहुत ही सरल शब्दों में लिखा गया है। अक्सर स्कूल, कॉलेज में विद्यार्थियों को प्रश्न पूछे जाते हैं: पर्यावरण प्रदूषण के बारे में हिंदी में लिखिए, Write essay on pollution in Hindi, पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 200 शब्द में लिखिए आदि। निचे दिए गये निबंध को हमने 100, 200, 300 शब्द, 500 words और 1000 शब्दों में लिखा है जिसे class 5,6,8, या क्लास 10, class 12 आदि का कोई भी विद्यार्थी लिख सकता है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 100 शब्दों में

प्रकृति में फैलने वाली गंदगियाँ ही प्रदूषण का कारण बनती हैं। जब ये गंदगियाँ और अशुद्धियाँ पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं तो उसे ही पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। हमारे पर्यावरण में अलग-अलग तरह से प्रदूषण हो सकते हैं जैसे: वायु, जल, ध्वनी, मृदा प्रदूषण आदि।

प्रदूषण से हवा, पानी, मौसम चक्र और जलवायु खराब होते हैं जिससे हमारे स्वास्थ्य को बहुत नुकसान होता है और हम रोगों के शिकार हो जाते हैं। प्रदूषण फैलने के कई कारण हैं जैसे: पेड़ों की कटाई, औद्योगीकरण, रसायनों का प्रयोग आदि।

ज्यादातर हम इंसानों की वजह से ही पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण रोकना हम इंसानों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए हमें लोगों को जागरूक करना होगा ताकि हम ऐसी कोई भी गतिविधि न करें जिससे प्रदूषण फैले और प्रकृति को नुकसान हो।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 200 शब्दों में

आज के समय में मनुष्य आधुनिकता की ओर लगातार बढ़ रहा है और इसी होड़ में हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मानव अपनी सुख-सुविधाओं को पूरा करने के लिए लगातार ऐसी गतिविधियाँ कर रहा है जिससे पर्यावरण प्रदूषण हो रहा है। प्रदूषण प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रही हैं और इससे भविष्य में भयानक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे:

वायु प्रदूषण:  वातावरण में उपस्थित वायु को दूषित करना वायु प्रदूषण कहलाता है। जहरीली गैस और धुआं हवा में मिल जाती है और वायु प्रदूषण को जन्म देती है। प्रदूषित वातावरण में सांस लेने से गंभीर बीमारियाँ होती हैं।

जल प्रदूषण:  जल में गंदगियाँ फैलाने जल प्रदूषण होता है। कल-कारखानों से निकली गंदगियाँ जल स्त्रोत में बहा दिए जाते हैं परिणामस्वरूप पानी उपयोग के लिए हानिकारक हो जाता है।

भूमि/मृदा प्रदूषण:  खेती में खतरनाक रसायनों का लगातार उपयोग, प्लास्टिक और अजैविक कचरे से मिट्टी या भूमि प्रदूषण होता है। इन सभी की वजह से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है।

प्रदूषण रोकने के उपाय

  • पेड़ कटाई पर लगाम लगानी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। 
  • कल-कारखानों से निकलने वाले हानिकारक अपशिष्टों को नष्ट करना चाहिए। 
  • हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। 
  • रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करके जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए
  • पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह विद्युत से चलने वाले वाहनों को प्राथिमिकता देनी चाहिए। 
  • निजी वाहनों के बजाए ज्यादा-से-ज्यादा सार्वजानिक परिवहनों का उपयोग करना चाहिए।  

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध – 300 शब्द

विज्ञान के क्षेत्र में आज हम बहुत ही तेजी से तरक्की कर रहे हैं, आधुनिक विज्ञान ने जहाँ हमारी जीवनशैली को सुविधाओं से युक्त बना दिया है वहीं इससे हमें पर्यावरण प्रदूषण जैसा भयानक अभिशाप भी मिला है। आज पेड़ों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, खतरनाक रसायनो के उपयोग ने प्रकृति में असंतुलन पैदा कर दिया है। समय रहते इस ओर यदि ध्यान न दिया गया तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

  • जनसँख्या वृद्धि: पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण हम इंसान है जो अपनी सुविधाओं के लिए प्रदूषण फैलाते रहते हैं। मनुष्य की बढती जनसंख्या और उनके जीवनयापन, सुख-सुविधाओं के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पर्यावरण प्रदूषण को कई गुना बढ़ा रहा है।
  • औद्योगीकरण:  बड़े उद्योग, कल-कारखाने अपशिष्ट पदार्थों को पानी में और हवा में जहरीली गैस छोड़ते हैं। पर्यावरण प्रदूषण के लिए औद्योगीकरण एक बहुत बड़ा कारण है।
  • आधुनिकीकरण:  आधुनिक सुख-सुविधाओं ने हमें अँधा बना दिया है हम अप्राकृतिक चीजों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं। मोटर-वाहन, एसी, फ्रिज, प्लास्टिक, केमिकल युक्त पदार्थ आदि के उपयोग से लगातार प्रदूषण फ़ैल रहा है।
  • रसायनों का प्रयोग: अधिक मुनाफा कमाने के लालच में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग बढ़ रहा है जिससे मिट्टी प्रदूषित होकर अनउपजाऊ हो रही है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव

पर्यावरण प्रदूषण का परिणाम बेहद खतरनाक है इससे लगातार वातावरण का तापमान बढ़ रहा है, जलवायु परिवर्तन हो रहे हैं, मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण प्रदूषण की वजह से हम इंसानों के सेहत पर भी असर पड़ रहा है अलग-अलग प्रकार के रोग पैदा हो रहे हैं। प्रदूषण से मनुष्य, पशु-पक्षी और प्रकृति को बहुत नुकसान हो रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण निबंध – 500 शब्द (Essay on Pollution in Hindi)

आज के समय में प्रदूषण एक गंभीर विषय है। प्रदूषण से प्रकृति को भारी नुकसान हो रहा है इसका रोकथाम बहुत ही जरुरी है। कई बार हमें यह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नही देते उदाहरण के लिए, आप हवा में मौजूद प्राकृतिक गैसों (ऑक्सीजन, कार्बन-डाइऑक्साइड) को देखने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, हालांकि वे अभी भी मौजूद हैं। धीरे-धीरे वातावरण में प्रदूषक जो हवा को मार रहे हैं और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को बढ़ा रहे हैं, वे मनुष्यों और पूरी धरती के लिए बहुत ही घातक हैं। प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाने की जरूरत है अन्यथा इसके भयानक दुष्परिणाम हो सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारक

प्रदूषण एक धीमा जहर है जो हमारे पर्यावरण और हमारे जीवन को दिन-ब-दिन नष्ट करता रहता है, इसे मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण।

वायु प्रदूषण वाहनों, कारखानों से निकलने वाले धुएं, उड़ती धूल आदि के कारण होता है।

ध्वनि प्रदूषण वाहनों के हॉर्न, मशीनों के चलने और अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तुओं के कारण होता है।

जल प्रदूषण कारखानों के अपशिष्ट पदार्थ और प्लास्टिक के कचरे और अन्य चीजों को नदियों और तालाबों में डालने से होता है।

प्रदूषण के रोकथाम के उपाय

  • वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने चाहिए, साथ ही जहां पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही हो, वहां इन्हें रोका जाना चाहिए। वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग व्यवसायों को नई तकनीक अपनानी चाहिए जिससे प्रदूषण कम हो।
  • जल प्रदूषण को कम करने के लिए हमें स्वच्छता पर अधिक ध्यान देना होगा। हम नदियों और तालाबों में कचरा फेंकते हैं, जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार फैक्ट्रियां बंद होनी चाहिए।
  • ध्वनि प्रदूषण ज्यादातर मनुष्य द्वारा ही किया जाता है, इसलिए यदि हम स्वयं हॉर्न का उपयोग बंद कर दें और यदि हम नियमित रूप से मशीनों की देखभाल करते हैं, तो वे कोई ध्वनि उत्पन्न नहीं करेंगे और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी।
  • वाहनों और मशीनों का रखरखाव बहुत महत्वपूर्ण है यदि उनका रखरखाव नहीं किया जाता है, तो वे बहुत अधिक ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।
  • यदि हम एक ही कार्यालय में जाते हैं तो हम सार्वजनिक वाहनों का उपयोग कर सकते हैं या कार साझा करने से ईंधन की बचत होगी और वायु प्रदूषण कम होगा।
  • हमें प्लास्टिक का उपयोग बंद करना है, सरकार भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा रही है, लेकिन प्लास्टिक का उपयोग तब तक बढ़ता रहेगा जब तक हम जागरूक नहीं हो जाते।

जिस तरह से हमारी धरती पर प्रदूषण बढ़ रहा है, आने वाले कुछ सालों में यह विनाश का रूप ले लेगा, अगर जल्द ही प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ सख्त नियम नहीं बनाए गए तो हमारी धरती का पूरा पर्यावरण खराब हो जाएगा और हमारा जीवन बर्बाद हो जाएगा।

अगर हमें प्रदूषण कम करना है तो सबसे पहले हमें खुद को सुधारना होगा और लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना होगा। अगर हमें प्रदूषण कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे और लोगों को भी पेड़ लगाने के प्रति जागरूक करना होगा तभी हम एक अच्छे भविष्य की कामना कर सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 1000 शब्दों में

जहां एक ओर आज मानव प्रगति कर रहा है और संसार काफी आधुनिक हो गया है। वहीं दूसरी ओर लगातार पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। यह पृथ्वी और पर्यावरण हम सबके लिए बहुत ज्यादा कीमती है इसलिए हम सब का यह कर्तव्य हो जाता है कि हम इनकी रक्षा करें।

तो ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पर्यावरण प्रदूषण क्यों होता है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें अपने आसपास होने वाली गतिविधियों को देखना होगा। इस तरह से हम पर्यावरण प्रदूषण को अच्छे से समझ सकते हैं और प्रकृति की रक्षा भी कर सकते हैं। अगर आप इसके बारे में सारी जानकारी जानना चाहते हैं तो पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध के इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। इस पोस्ट में हम आपको सारी जरूरी बातों की जानकारी देंगे।

पर्यावरण प्रदूषण क्या होता है ?

सबसे पहले हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि पर्यावरण प्रदूषण का मतलब होता है जब मनुष्य द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों से दूषित चीजें पर्यावरण में जाकर मिल जाती हैं। इसकी वजह से हर व्यक्ति की दिनचर्या काफी हद तक प्रभावित होती है और उसे उसके कार्य करने में बाधा होती है।

लेकिन पर्यावरण प्रदूषण को फैलाने के जिम्मेदार मनुष्य ही होते हैं जो कि हर दिन ऐसे बहुत सारे काम करते हैं जिससे कि प्रदूषक तत्व वातावरण में फैल जाते हैं। इस प्रकार से प्रदूषण की वजह से अनेकों बीमारियां भी जन्म लेने लगती हैं और हर व्यक्ति का जीवन इससे काफी अधिक प्रभावित होता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते प्रदूषण को रोकने का काम किया जाए जिससे कि सभी स्वस्थ जीवन जी सकें। 

पर्यावरण प्रदूषण फैलने के मुख्य कारण 

प्रकृति ने मनुष्य को बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन दिए हैं लेकिन अपने स्वार्थी स्वभाव के कारण वह उन्हें नष्ट करते जा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति इस बात को नहीं समझना चाहता कि अगर यह पूरा पर्यावरण ही प्रदूषित हो गया तो ऐसे में भविष्य में जो पीढ़ियां आएंगीं उनके स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से बुरा प्रभाव पड़ेगा।

इस प्रकार से एक दिन ऐसा भी आ जाएगा जब इस संसार में जीवित रहने के लिए पृथ्वी पर कोई भी प्राकृतिक संसाधन नहीं रहेगा। इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि पर्यावरण प्रदूषण के जो भी मुख्य कारण हैं उन्हें जानकर उन्हें दूर करने की कोशिश की जाए। पर्यावरण प्रदूषण के कुछ सबसे प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं – 

  • लोगों द्वारा वाहन का बहुत ज्यादा प्रयोग करने से
  • हर जगह औद्योगिक गतिविधियों में तीव्रता होने से
  • जनसंख्या के बढ़ने की वजह से
  • कल-कारखानों और कृषि अपशिष्टों के कारण से
  • शहरीकरण और औद्योगीकरण में तेजी की वजह से
  • हद से ज्यादा वैज्ञानिक साधनों का इस्तेमाल करने से
  • पेड़ों को अंधाधुंध काटने से और घनी आबादी वाले इलाकों में हरियाली ना होने की वजह से
  • सड़कों और बांधों का निर्माण करने से
  • खनिज पदार्थों के अत्यधिक दोहन की वजह से 

पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य प्रकार 

वैसे तो पर्यावरण प्रदूषण के बहुत सारे प्रकार हैं जिनकी वजह से हमारा वातावरण काफी अधिक नकारात्मक हो गया है। लेकिन इसके जो मुख्य प्रकार हैं उनके बारे में जानकारी इस तरह से है – 

वायु प्रदूषण 

हर व्यक्ति को जिंदा रहने के लिए स्वच्छ वायु की आवश्यकता होती है। इतना ही नहीं पृथ्वी पर जितने भी पेड़ पौधे और जानवर हैं उनके लिए भी हवा बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन सांस लेने के लिए बहुत जरूरी होती है। लेकिन लोग अब अपनी भौतिक जरूरतों की पूर्ति करने के लिए वायुमंडल में मौजूद सभी गैसों के बैलेंस को खत्म करने में लगे हुए हैं। विशेषतौर से शहरों की हवा तो बहुत ही ज्यादा जहरीली और घुटन वाली होती जा रही है। वायु प्रदूषण के पीछे सबसे प्रमुख घटक है वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों का धुआं, जीवाश्म ईंधन को जलाना इत्यादि।

जल प्रदूषण 

वैसे तो हर कोई कहता है कि जल हमारा जीवन है लेकिन फिर भी आज मानव उसे प्रदूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। हर कोई जानता है कि पानी के बिना कोई भी जीव जिंदा रहने की सोच भी नहीं सकता फिर चाहे वह मनुष्य हो, पशु पक्षी हो या फिर पेड़ पौधे। जितने भी पानी के प्राकृतिक सोर्स हैं उनमें प्रदूषक तत्व जैसे खनिज, अपशिष्ट पदार्थ, गैस, कचरा आदि मिल जाते हैं। ऐसे में जल पीने योग्य नहीं रह जाता क्योंकि उसमें गंदगी की वजह से वायरस पैदा हो जाते हैं। ऐसे में अगर कोई भी दूषित जल को पी लेता है तो वह उसके लिए काफी हानिकारक होता है। 

ध्वनि प्रदूषण 

ध्वनि प्रदूषण भी पर्यावरण को प्रदूषित करने में काफी हद तक जिम्मेदार है। हद से ज्यादा शोर किसी को भी पसंद नहीं होता लेकिन कई बार बहुत से लोग अपने मनोरंजन के लिए इस बात की परवाह नहीं करते कि कोई दूसरा व्यक्ति इससे परेशान हो सकता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि हद से ज्यादा तेज आवाज व्यक्ति की सुनने की क्षमता को धीरे-धीरे बहुत ज्यादा कम कर देता है। इतना ही नहीं एक समय ऐसा भी आता है जब व्यक्ति की सुनने की शक्ति पूरी तरह से खत्म हो जाती है। शोर की वजह से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर तो कोई बुरा असर नहीं होता लेकिन तेज आवाज सहन कर पाना अत्यधिक मुश्किल होता है। ध्वनि प्रदूषण की वजह से इंसान किसी भी काम पर फोकस नहीं कर पाता और बहुत से कामों में उसे असफलता का मुंह देखना पड़ता है। 

पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के उपाय 

जिस प्रकार से पर्यावरण में प्रदूषण फैलाने का कार्य मनुष्य कर रहे हैं तो पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए भी इंसान को ही आगे आना होगा। यह हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रयास किए जाएं। पर्यावरण प्रदूषण इस समस्या को कम करने के कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं जैसे कि – 

  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोक देना चाहिए। इसके अलावा अपने आसपास वृक्ष जरूर लगाएं ‌
  • पर्यावरण प्रदूषण को लेकर युवाओं में जागरूकता फैलानी चाहिए। 
  • अपने आसपास गंदगी और कूड़े के ढेर को इकट्ठा ना होने दें। 
  • पेट्रोलियम के साथ-साथ कोयला जैसे उत्पादों का भी इस्तेमाल कम से कम करें। 
  • कारखाने शहर से दूर बनाएं जाने चाहिएं जिससे कि उनमें से निकलने वाला धुआं वायु में घुल कर लोगों में बीमारी ना फैला सके।
  • यातायात के लिए ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए जो कम धुआं छोड़ते हों।
  • नदियों में कचरा ना फेंके। 
  • जितना ज्यादा हो सके कपड़े और जूट के बने हुए थेलों का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक बैगों को ना कहें। 

निष्कर्ष 

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध के इस लेख में हमने आपको बताया कि पर्यावरण प्रदूषण क्या होता है और इससे जुड़ी दूसरी जरूरी बातें भी बताईं। इसमें कोई शक नहीं कि लोगों में जागरूकता फैला कर हम अपने पर्यावरण को काफी हद तक स्वच्छ बना सकते हैं। इसके लिए केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि हर इंसान को प्रयास करना होगा। अगर आपको हमारे द्वारा दी गई सारी बातों की जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। 

प्रदूषण पर निबंध :

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हमें उम्मीद है की प्रदूषण पर लिखा गया यह निबंध (Essay on Pollution in Hindi) आपके काम आएगा। आपको यह निबंध कैसा लगा हमें कमेंट करके जरुर बताएं।

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प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 100 - 500 शब्दों में यहाँ देखें

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प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। आज विश्व की अधिकतर आबादी प्रदूषण की समस्या से ग्रसित है। ऐसे में प्रदूषण पर निबंध (eassay on pollution in hindi) लिखने के लिए अक्सर स्कूलों में कहा जाता है। छात्र इस प्रदूषण पर निबंध (eassay on pollution in hindi) के माध्यम से प्रदूषण जैसी विशाल समस्या के बारे में जानने के साथ-साथ इसकी विषय की संवेदनशीलता का भी पता लगा सकते हैं तथा कैसे ये भयंकर रूप में अब हमारे समक्ष प्रकट हुई है, इसके स्तर का भी अनुमान प्राप्त कर सकते हैं। हिंदी में पत्र लेखन सीखें ।

प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 100 - 500 शब्दों में यहाँ देखें

प्रदूषण देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक ज्वलंत समस्या का रूप धारण कर चुकी है। प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी के योगदान की आवश्यकता होगी। प्रदूषण पर निबंध (Essay on pollution in Hindi) से देश के भविष्य छात्रों में जागरूकता आएगी तथा प्रदूषण पर निबंध (Essay on pollution in Hindi) से उनको प्रदूषण की समस्या को दूर करने में अपना योगदान देने में आसानी होगी। इस लेख से प्रदूषण क्या है और प्रदूषण के कितने प्रकार का होता है - वायु, जल, ध्वनि, पर्यावरण, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है, जिससे प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (Essay on Pollution in Hindi) ऑनलाइन सर्च कर रहे विद्यार्थियों को प्रदूषण पर निबंध (essay on pollution) लिखने में सहायता मिलेगी।

विश्व पर्यावरण दिवस पर निबंध (essay on world environment day) लिखने में भी इस लेख की सहायता ली जा सकती है। इसके अलावा कई ऐसे छात्र भी होते हैं जिनकी हिंदी विषय/भाषा पर पकड़ कमजोर होती है, ऐसे में प्रदूषण पर निबंध (pradushan par nibandh) विशेष इस लेख से उन्हें निबंध लिखने के तरीके को समझने व लिखने में सहायता प्राप्त होगी।

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प्रदूषण पर निबंध (pradushan par nibandh) - प्रदूषण क्या है? (What is Pollution)

प्रदूषण, जिसे पर्यावरण प्रदूषण भी कहा जाता है। पर्यावरण में किसी भी पदार्थ (ठोस, तरल, या गैस) या ऊर्जा का किसी भी रूप (जैसे गर्मी, ध्वनि, या रेडियोधर्मिता) में उसके पुनर्नवीनीकरण, किसी हानिरहित रूप में संग्रहण या विघटित करने के स्तर से ज्यादा तेजी से फैलना ही प्रदूषण (eassay on pollution in hindi) कहलाता है।

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प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - प्रदूषण का वर्तमान परिदृश्य

प्रदूषण हमारे जीवन के उन प्रमुख विषयों में से एक है, जो इस समय हमारी पृथ्वी को व्यापक स्तर पर नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो लंबे समय से चर्चा व चिंता का विषय रहा है तथा 21वीं सदी में इसका हानिकारक प्रभाव बड़े पैमाने पर महसूस किया जा रहा है। हालांकि विभिन्न देशों की सरकारों ने इसके प्रभाव को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी इस समस्या के समाधान हेतु एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

इससे कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं में गड़बड़ी आती है। इतना ही नहीं, आज कई वनस्पतियां और जीव-जंतु या तो विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। प्रदूषण की मात्रा में तेजी से वृद्धि के कारण पशु तेजी से न सिर्फ अपना घर खो रहे हैं, बल्कि जीवित रहने लायक प्रकृति को भी खो रहे हैं। प्रदूषण ने दुनिया भर के कई प्रमुख शहरों को प्रभावित किया है। इन प्रदूषित शहरों में से अधिकांश भारत में ही स्थित हैं। दुनिया के कुछ सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली, कानपुर, बामेंडा, मॉस्को, हेज़, चेरनोबिल, बीजिंग आदि शामिल हैं। हालांकि इन शहरों ने प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, मगर फिर भी उन्हें अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। इन स्थानों की वायु गुणवत्ता खराब है और भूमि तथा जल प्रदूषण में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। अब समय आ गया है कि इन शहरों से प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए, यहाँ मौजूद प्रशासन एक ठोस रणनीति तैयार करके उसपर अमल करे।

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प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्या है? (What is Air Quality Index (AQI)?)

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) (Air Quality Index (AQI)) एक सूचकांक है जिसका उपयोग सरकारी एजेंसियों द्वारा वायु प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए किया जाता है ताकि आम लोग वायु गुणवत्ता को लेकर जागरूक हो सकें। जैसे-जैसे एक्यूआई (AQI) बढ़ता है, इसका मतलब है कि एक बड़ी जनसंख्या गंभीर प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों का अनुभव करने वाली है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI लोगों को यह जानने में मदद करता है कि स्थानीय वायु गुणवत्ता उनके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) पांच प्रमुख वायु प्रदूषकों के लिए एक्यूआई (AQI) की गणना करती है, जिसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक स्थापित किए गए हैं।

  • जमीनी स्तर की ओजोन (ग्राउंड लेवल ओज़ोन)
  • कण प्रदूषण/पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5/pm 10)
  • कार्बन मोनोऑक्साइड
  • सल्फर डाइऑक्साइड
  • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड

प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - प्रदूषण के प्रकार

मूल रूप से प्रदूषण चार प्रकार का होता है, जो नीचे उल्लिखित है -

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)
  • जल प्रदूषण (Water Pollution)
  • ध्वनि प्रदूषण (Pollution Essay)
  • मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

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प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - आइए एक करके प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों के बारे में जानें:

वायु प्रदूषण : वायु प्रदूषण मुख्य रूप से वाहनों से गैस के उत्सर्जन के कारण होता है। बेहद ही हानिकारक गैस कारखानों तथा उद्योगों में उप-उत्पाद के रूप में उत्पादित होती हैं, प्लास्टिक और पत्तियों जैसे जहरीले पदार्थों को खुले में जलाने से, वाहनों के एग्जॉस्ट से, रेफ्रीजरशन उद्योग में उपयोग किए जाने वाले सीएफ़सी से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है।

हाल के दशक में बेहतर आय की वजह से भारत में सड़कों पर वाहनों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। ये सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को फैलाने के लिए भी जिम्मेदार हैं। ये गैसें पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करने के लिए जिम्मेदार हैं। इनकी वजह से सांस लेने की कई समस्याएं, श्वसन रोग, कई प्रकार के कैंसर आदि जैसी बीमारियाँ तेजी से पनप रही हैं।

जल प्रदूषण : जल प्रदूषण आजकल मनुष्यों के सामने मौजूद सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। सीवेज अपशिष्ट, उद्योगों या कारखानों आदि के कचरे को सीधे नहरों, नदियों और समुद्रों जैसे जल निकायों में डाला जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप समुद्री जीव जंतुओं के आवास का नुकसान हो रहा है और जल निकायों में घुली ऑक्सीजन का स्तर भी घट रहा है। पीने योग्य पानी की कमी जल प्रदूषण का एक बड़ा दुष्प्रभाव है। लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं जिससे हैजा, डायरिया, पेचिश आदि रोग होने का खतरा रहता है।

मृदा प्रदूषण : भारतीय आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। इस काम के लिए, किसान बहुत सारे शाकनाशी, उर्वरक, कवकनाशी और अन्य समान प्रकार के रासायनिक यौगिकों का उपयोग करते हैं। इनके इस्तेमाल से मिट्टी दूषित होती है और इससे मिट्टी आगे फसल उगाने लायक नहीं रह जाती। इसके अलावा, अगर अधिकारी जमीन पर पड़े औद्योगिक या घरेलू कचरे को डंप नहीं करते हैं, तो यह भी मिट्टी के प्रदूषण में बड़ा योगदान देता है। इसकी वजह से मच्छरों के प्रजनन में वृद्धि होती है, जो डेंगू जैसी कई जानलेवा बीमारियों का कारण बनता है। ये सभी कारक मिट्टी को विषाक्त बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।

ध्वनि प्रदूषण : वायु प्रदूषण में योगदान देने के अलावा, भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में मौजूद वाहन, ध्वनि प्रदूषण में भी भरपूर योगदान देते हैं। यह उन लोगों के लिए खतरनाक है जो शहरी क्षेत्रों में या राजमार्गों के पास रहते हैं। यह लोगों में चिंता और तनाव जैसे संबंधित मुद्दों का कारण बनता है।

इसके अलावा, पटाखे, कारखानों के कामकाज, लाउडस्पीकर की आवाज (विशेष रूप से समारोहों के मौसम में) आदि भी ध्वनि प्रदूषण में अपनी भूमिका निभाते हैं। अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह हमारे मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है।

अक्सर, दिवाली के त्योहार के अगले दिन मीडिया में यह बताया जाता है कि कैसे पटाखों की वजह से भारत के प्रमुख शहरों में ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है।

हालाँकि ये चार प्रमुख प्रकार के प्रदूषण हैं, जीवनशैली में बदलाव के कारण कई अन्य प्रकार के प्रदूषण भी देखे गए हैं जैसे कि रेडियोधर्मी प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण अन्य। यदि किसी स्थान पर अधिक या अवांछित मात्रा में मानवनिर्मित प्रकाश पैदा किया जाता है, तो यह प्रकाश प्रदूषण में योगदान देता है। आजकल, कई शहरी क्षेत्र अधिक मात्रा में अवांछित प्रकाश का सामना कर रहे हैं।

हम परमाणु युग में जी रहे हैं। चूंकि बहुत से देश अपने स्वयं के परमाणु उपकरण विकसित कर रहे हैं, इससे पृथ्वी के वातावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है। इसे रेडियोधर्मी प्रदूषण के रूप में जाना जाता है। रेडियोधर्मी पदार्थों का संचालन और खनन, परीक्षण, रेडियोधर्मी बिजली संयंत्रों में होने वाली छोटी दुर्घटनाएँ रेडियोधर्मी प्रदूषण में योगदान देने वाले अन्य प्रमुख कारण हैं।

उपयोगी लिंक्स -

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प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) - ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारक है। धरती के चारों ओर गर्मी को फंसाने वाले प्रदूषण की परत ही मुख्य कारण है, जो आजकल ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को बढ़ा रही है। जैसे मनुष्य जब जीवाश्म ईंधन जलाते हैं, प्लास्टिक जलाते हैं, वाहन से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जंगल अधिक स्तर पर जलाए जाते हैं, तो इनसे खतरनाक गैस का उत्सर्जन होता है।

एक बार जब यह गैस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाती है, तो अंततः यह पूरे विश्व में फैल जाती है। नतीजतन, गर्मी फिर से उत्सर्जित होने के बाद अगले 50 या 100 सालों तक पृथ्वी के चारों ओर फंस जाती है। सबसे गंभीर बात यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस का स्तर खतरनाक दर से बढ़ा है। इससे आने वाली पीढ़ी सैकड़ों वर्षों तक ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के प्रभावों को महसूस करेगी।

प्रदूषण पर निबंध (pradushan par nibandh) - प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम

पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकारियों ने कई कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल : भारत सरकार ने भारत में पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर अंकुश लगाने के लिए NGT की स्थापना की थी। 2010 से जब कई उद्योग एनजीटी के आदेश का पालन करने में विफल रहे हैं, तो इसने ऐसे उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया। इसने कई प्रदूषित झीलों को साफ करने में भी मदद की है। इसने गुजरात में कई कोयला आधारित उद्योगों को बंद करने का भी आदेश दिया, जिससे वायु प्रदूषण में इजाफा हो रहा था।

ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत : पिछले कुछ वर्षों से, भारत सरकार लोगों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। तमिलनाडु राज्य के निवासियों के लिए अपनी छतों पर सौर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली रखना अनिवार्य है। वैकल्पिक ऊर्जा के अन्य स्रोत जैव ईंधन, पवन ऊर्जा, जलविद्युत ऊर्जा आदि हैं।

BS-VI ईंधन : भारत सरकार द्वारा घोषणा के बाद देश अब BS-VI (भारत चरण VI) ईंधन का उपयोग करने में सक्षम है। इस नियम अस्तित्व में आने के बाद, वाहनों से सल्फर के होने वाले उत्सर्जन में 50% से अधिक की कमी आने की संभावना है। यह डीजल कारों से नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को 70% और पेट्रोल कारों में 25% तक कम करता है। इसी तरह, कारों में पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में 80% की कमी आएगी।

वायु शोधक: वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए लोग अब वायु शोधक विशेष रूप से इनडोर में इस्तेमाल किए जाने वाले का उपयोग कर रहे हैं। एयर प्यूरीफायर हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर को साफ करते हैं, हानिकारक बैक्टीरिया को हटाते हैं और हवा की गुणवत्ता में काफी हद तक सुधार करते हैं।

प्रदूषण पर निबंध (pradushan par nibandh) - प्रदूषण पर अंकुश लगाने में यूएनओ की भूमिका

अपने बैनर के तहत, संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1972 में प्रदूषण के मुद्दे को संबोधित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की शुरुआत की गई थी। इसने जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन, पर्यावरण प्रशासन, संसाधन दक्षता आदि जैसे कई मुद्दों की तरफ आम लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इसने कई सफल संधियों को मंजूरी दी है, जैसे कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) जो गैसों के उत्सर्जन को सीमित करने के लिए सुरक्षात्मक ओजोन परत को पतला कर रहे थे, जहरीले पारा आदि के उपयोग को सीमित करने के लिए मिनामाता कन्वेंशन (2012) यूएनईपी प्रायोजित 'सौर ऋण कार्यक्रम' जहां विभिन्न देशों के लाखों लोगों को सौर ऊर्जा पैनल प्रदान किए गए थे।

प्रदूषण पर निबंध (pradushan par nibandh) - प्रदूषण पर अंकुश लगाने के विभिन्न तरीके

हालांकि विभिन्न शहरों के अधिकारी प्रदूषण के मुद्दे पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में नागरिकों और आम लोगों का भी यह कर्तव्य है कि वे इस प्रक्रिया में अपना योगदान दें। सभी प्रकार के प्रदूषण को रोकने के कुछ महत्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं -

पटाखों का इस्तेमाल बंद करें : जब आप दशहरा, दिवाली या किसी अन्य अवसर पर त्योहार मनाते हैं, तो पटाखों का इस्तेमाल ना करें। यह ध्वनि, मिट्टी के साथ-साथ प्रकाश प्रदूषण का कारण बनता है। साथ ही इसका हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

वाहनों का प्रयोग सीमित करें : वाहन प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। वाहनों का प्रयोग कम से कम करें। यदि संभव हो, तो उन्हें व्यक्तिगत उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने का प्रयास करें। आने-जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें।

अपने आस-पास साफ-सफाई रखें : एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य होना चाहिए कि हम अपने घर के आस-पास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें। हमें कचड़ा इधर-उधर फेंकने की बजाय कूड़ेदान में फेकना चाहिए।

रिसाइकल और पुन: उपयोग - कई गैर-बायोडिग्रेडेबल उत्पाद जैसे कि प्लास्टिक से बने दैनिक उपयोग की वस्तुएं हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। हमें या तो इन्हें ठीक से डिकम्पोज करना होगा या इसे रिसाइक्लिंग के लिए भेजना होगा। आजकल सरकार प्लास्टिक को रिसायकल करने के लिए बहुत सारी योजनाएं चला रही है, जहां नागरिक न केवल अपने प्लास्टिक के कचरे को दान कर सकते हैं, बल्कि अन्य वस्तुओं के बदले में इसका आदान-प्रदान भी कर सकते हैं।

पेड़ लगाएं : कई कारणों से पेड़ों की कटाई जैसे सड़कों का चौड़ीकरण, घर बनाना आदि के कारण विभिन्न प्रकार के प्रदूषण में वृद्धि हुई है। पौधे वातावरण में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड आदि जैसे हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं। चूंकि वे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन छोड़ते हैं, इसलिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाएं और उनकी देखभाल करें।

प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिसका हमें जल्द से जल्द समाधान करने की जरूरत है, ताकि मनुष्य व अन्य जीव जन्तु, इस ग्रह पर सुरक्षित रूप से रह सकें। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस मुद्दे के समाधान के लिए सुझाए गए उपायों का पालन करें। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपने घर को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाएं। पृथ्वी को जीवित रखने के लिए हमें इसे प्रदूषित करना बंद करना होगा।

Frequently Asked Question (FAQs)

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) (Air Quality Index) दैनिक आधार पर वायु गुणवत्ता की रिपोर्ट करने के लिए एक सूचकांक है।

प्रदूषण पर हिंदी में निबंध लिखने के लिए आप इस लेख को संदर्भित कर सकते हैं। इस लेख में प्रदूषण पर निबंध से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रदूषण मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं, जिन्हे वायु प्रदूषण (Air Pollution), जल प्रदूषण (Water Pollution), ध्वनि प्रदूषण (Pollution Essay), मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) के रूप में जाना जाता है। 

पटाखों के इस्तेमाल पर कमी, अधिक से अधिक पेड़ लगाकर, वाहनों के उपयोग पर कमी और अपने आस-पास स्वच्छता रखकर प्रदूषण में कमी की जा सकती है। 

सांविधिक संगठन, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वर्ष 1974 में गठित किया गया था।

पर्यावरण में किसी भी पदार्थ (ठोस, तरल, या गैस) या ऊर्जा का किसी भी रूप (जैसे गर्मी, ध्वनि, या रेडियोधर्मिता) में उसके पुनर्नवीनीकरण, किसी हानिरहित रूप में संग्रहण या विघटित करने के स्तर से ज्यादा तेजी से फैलना ही प्रदूषण है। प्रदूषण उन प्रमुख मुद्दों में से एक है, जो हमारी पृथ्वी को व्यापक स्तर पर प्रभावित कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो लंबे समय से चर्चा में है, 21वीं सदी में इसका हानिकारक प्रभाव बड़े पैमाने पर महसूस किया गया है। हालांकि विभिन्न देशों की सरकारों ने इन प्रभावों को रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध – Essay on Environmental pollution In Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध: पर्यावरण की स्थिति उस स्थिति को संदर्भित करती है, जो अपने आप में मानव जीवन को प्रभावित करती है. गंभीर प्रदूषण पर्यावरणीय क्षति का कारण बन सकता है. प्रदूषण जीवन में दखल देता है. यह पूरी दुनिया के लिए बहुत खतरनाक है क्यूंकि प्रदूषण को रोकने में कोई भी सक्षम नहीं है. प्रदूषण को रोकने से पहले प्रदूषण के बारे में अच्छे से जान लेना चाहिए. इसलिए मैं आज आपके लिए लेकर आया हूँ पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Essay on Environmental pollution in Hindi). जिसमें आप पर्यावरण प्रदूषण के बारे में सब कुछ जान पाएंगे.

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 350 शब्दों – Environmental pollution essay in Hindi

हमारे पृथ्वी-ग्रह और हम सबको चारो तरफ को घेरने वाली हर चीज को पर्यावरण कहा जाता है. इसका अर्थ उन सभी प्रभावों और परिस्थितियों से है जो हमें और अन्य जीवित प्राणियों को सीधा प्रभावित करता है. वायु, जल, पृथ्वी, मिट्टी आदि जैसे प्राकृतिक तत्वों में एक निश्चित संतुलन के कारण ही हमारे ग्रह पर जीवन संभव हुआ है अन्यथा पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने वाला एक और बेजान ग्रह होता.

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के विनाश और पर्यावरण के प्रदूषण के कारण मानव जीवन संकट में आ गया है. तेजी से और अंधाधुंध औद्योगीकरण ने पर्यावरण प्रदूषण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है. मिलों और कारखानों से निकास फ़नल के माध्यम से भारी धुआँ निकलता है. ऑटोमोबाइल के निकास पाइप भी मानव स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं. शहरी क्षेत्रों में हवा कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोकार्बन, कीटनाशक, फ्लाई ऐश, कालिख और कभी-कभी रेडियोधर्मी पदार्थों जैसे प्रदूषकों से भी संतृप्त होती है. नतीजतन, जैव मंडल में ओजोन परत बहुत खतरनाक साबित होने के लिए बाध्य है.

paryavaran pradushan par nibandh

पर्यावरण प्रदूषण को कैसे खत्म करें               

पर्यावरण प्रदूषण के खतरे की जाँच के लिए वैश्विक और संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है. हमारे वातावरण को बचाने के आंदोलन में जनता को शामिल होना चाहिए. स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ाए जाने और सीखने के लिए पर्यावरण शिक्षा अनिवार्य विषय होना चाहिए. प्रदूषण विरोधी कानूनों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. इस गंभीर समस्या के प्रति जनजागृति और जागरूकता को ठीक से सिखाया जाना चाहिए. हमें पूरे देश में बड़ी संख्या में पेड़ उगाने चाहिए. इस कार्य में सरकार की मदद करना भी हमारा दायित्व है.

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को मिटाने के लिए स्कूल और कॉलेजों के छात्रों के बहुत सारे कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ हैं. वर्ष में कम से कम एक सप्ताह वन महोत्सव मनाकर वनों की कटाई को बहाल किया जाए. वे अपने घरों के पास और अपने शिक्षण संस्थानों के परिसर में भी पेड़ लगा सकते हैं. वे अपने पड़ोसियों के बीच इस खतरे के बारे में जागरूकता पैदा कर सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन पर खराब प्रभाव पड़ता है और इसे समय रहते कैसे मिटाया जाए.

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 पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्दों – essay on Environmental pollution in Hindi [500 words]

हमारे चारों तरफ या हमारे आसपास को पर्यावरण कहा जाता है. जब हमारा पर्यावरण विशेष रूप से प्रदूषित होता है, तो हम कहते हैं, “हमारा पर्यावरण प्रदूषित है”. जब हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है, तो हम कई तरह की बीमारियों से पीड़ित होते हैं. लेकिन अगर हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है, तो हमारा जीवन में बहुत सारे दिक्कत पैदा हो जाते हैं. इसलिए हमें पर्यावरण प्रदूषण और इस प्रदूषण के उन्मूलन के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए. तब हम हमेशा प्रदूषण रहित अपने पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं.

घर में हम जो ईंधन जलाते हैं उससे निकलने वाला धुआं हमारे वातावरण को कार्बन डाइऑक्साइड से भर देता है. आजकल, शहरों और गांवों में बड़ी संख्या में मोटरसाइकिल और कार और बसें और ट्रक चलते हैं. इससे निकलने वाला धुआं कार्बन डाइऑक्साइड से हमारे गाँव और सहर के पर्यावरण प्रदूषित होता है. सीवर, खाद और शौचालय आदि से निकलने वाली गैस हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करती है. लोग बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू खाने के वजह से इनसे निकलने वाले जहरीले धुएं हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं. औद्योगिक शहरों में कारखानों से निकलने वाला धुआं हमारे औद्योगिक शहरों में कार्बन डाइऑक्साइड से वातावरण को भर देता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड हमारे औद्योगिक शहर के पर्यावरण को प्रदूषित करता है. यह सभी कार्बन डाइऑक्साइड हमारे पर्यावरण के वातावरण में अवशोषित हो जाने से हम सब खतरे में रहते हैं.

पर्यावरण प्रदूषण का उन्मूलन

जो ऑक्सीजन हमारे जीवन को बचाने के लिए वायुमंडल में दिखाई देती है, वह ऑक्सीजन पेड़ों से आती है. पौधे अपने पत्तों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है और ऑक्सीजन छोड़ता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड पेड़ का भोजन है. पेड़ की वजह से कार्बन डाइऑक्साइड नष्ट हो जाता है. पर्यावरण प्रदूषण को खत्म करने के लिए हमें अपने पर्यावरण में बहुत सारे पेड़ों की आवश्यकता है. पहले हमारे पर्यावरण में बहुत सारे पेड़ मौजूद थे; लेकिन हमारे लोगों ने पेड़ों को काट कर जंगल से पेड़ों की संख्या कम कर दिया. इसलिए अब हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए असंख्य पेड़ लगाने होंगे. धुआं रहित ईंधन का उपयोग करना पड़ेगा. घर पर और बाहर में भी स्वच्छ शौचालय स्थापित करने की आवश्यकता है. ड्रेनेज और कचरे को वैज्ञानिक रूप से वाष्पित किया जाना चाहिए. पर्यावरण की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. विशेष रूप से, वनीकरण और सामाजिक वनीकरण को तेज करने की आवश्यकता है. पेड़ काटना को असामाजिक अपराध के रूप में गिना जाना चाहिए और पेड़ काटने वालों को सजा देनी चाहिए.

पर्यावरण प्रदूषण अब हमारे गाँव, शहर या देश में सिर्फ एक समस्या होकर नहीं रह गया है. यह अब हमारे साथ साथ पूरी दुनिया की समस्याओं में भी शामिल है. हर साल 5 जून को दुनिया के लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. हमारे छात्र समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की भी आवश्यकता है. हम अपने आसपास के लोगों को पर्यावरण के महत्व को समझा सकते हैं और हम उनके साथ इस दिशा में काम कर सकते हैं.

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध – Essay on Environmental pollution in Hindi [1000 words]

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पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिसमें रहने का वातावरण है. पर्यावरण की वर्तमान परिभाषा बहुत व्यापक है. मिट्टी, पानी, हवा, पौधों और जानवरों के संयोजन में पर्यावरण का निर्माण; लेकिन आम लोग सीमित अर्थ में उनके आसपास के वातावरण को पर्यावरण के रूप में समझते हैं. एक बच्चे के लिए उसकी माँ की गोद, छात्रों के लिए स्कूल का वातावरण एक छोटा पर्यावरण है. गाँवों से लेकर दुनिया तक के छोटे से बड़े वातावरण की कल्पना की जा सकती है. समय के साथ प्रगति के नाम पर मनुष्य ने अपनी बुद्धि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नए आविष्कारों को लागू करके प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने के लिए प्रकृति पर अत्याचार करते हुए अपने रहस्यों का खुलासा करने का सहारा लिया है. परिणामस्वरूप, पर्यावरण प्रदूषित होता है और मानव समाज के लिए एक गंभीर खतरा भी बन जाता है .

प्रदूषण के विभिन्न कारण और परिणाम

आधुनिक सभ्यता की सबसे बड़ी, अकल्पनीय और भयानक समस्या पर्यावरण प्रदूषण है. इस मानवीकृत समस्या के कई कारण हैं. पर्यावरण प्रदूषण आमतौर पर मिट्टी, पानी, वायु और ध्वनि प्रदूषण के कारण होता है. विश्लेषणात्मक रूप से, जनसंख्या वृद्धि, वनों की कटाई, औद्योगीकरण, अप्रत्याशित वाहनों की शुरूआत, अपशिष्ट डंपिंग, रसायनों का व्यापक उपयोग, कंक्रीट के जंगलों का निर्माण और परमाणु विस्फोटों का अन्वेषण प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण भूमिका हैं.

भारत वर्तमान में जनसंख्या के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती है और पालतू जानवरों की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे प्राकृतिक संसाधनों पर भोजन, आश्रय, चराई और ईंधन के लिए दबाव बढ़ता है. प्रकृति की उत्पीड़न पर्यावरण प्रदूषण के कारण सहायक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है.

जंगल ही जीवन है. सभ्यता विकास के प्रमुख तत्व; लेकिन निष्पक्ष वनों की कटाई या वनों की कटाई पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट का एक प्रमुख कारण है. हमारे देश में हर साल 13 से 15 लाख हेक्टेयर जंगल नष्ट हो जाते हैं. 2 मिलियन हेक्टेयर खेत और चरागाह भूमि को नीच भूमि में बदल दिया जा रहा है. वन संसाधनों के तेजी से गिरावट के साथ, जलवायु परिवर्तन, बाढ़, और तूफान विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर रहे हैं.

मिट्टी हमारी मां है. जानवरों, पक्षियों, पौधों, और मनुष्यों सहित सभी जीवित चीजें, इसके शरीर में रहती हैं. मिट्टी भोजन, पानी आदि के साथ जीवन की सभी बुनियादी आवश्यकताएं प्रदान करती है. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी प्रदूषित होती है. यांत्रिक कृषि विधियों को अपनाने के परिणामस्वरूप मिट्टी का क्षरण तेज होता है. वनों की कटाई भी मिट्टी के क्षरण का एक कारण है. एक सेंटीमीटर ऊपरी मिट्टी को बनाने में 500-600 साल लगते हैं.

जल ही जीवन है. यह मनुष्य के लिए भगवान का सबसे बड़ा योगदान है. सतही जल संसाधन तेजी से घट रहे हैं. सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के 70 प्रतिशत जल संसाधन प्रदूषित हैं. पानी आमतौर पर तीन तरीकों से दूषित होता है. भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं में जल दूषित होता है. क्लोरीन, अमोनियम, सल्फेट विभिन्न प्रकार के कारखानों से निकलता हुआ एसिड के साथ दूषित पानी नदी के पानी को दूषित करता है. नदी में जहरीली मछली खाने से लोग बीमार पड़ते हैं. फल, सब्जियां आदि विषाक्त और बेस्वाद हैं. पेयजल की गंभीर कमी है.

                                                                   “Water Water everywhere

                                                                     But not a drop to drink.”

देश में लगभग 70 प्रतिशत बच्चों की मौत दूषित पेयजल के कारण होती है. दूषित पानी पीने से भी लाखों लोग संक्रमित हैं. वनों की कटाई और भूजल संसाधनों के अधिक उपयोग के कारण जल स्तर घट रहा है. नलकूपों से पानी का बहाव घट रहा है.

औद्योगिक प्रगति का प्रतीक है. मानव जाति को औद्योगिकीकरण से बहुत लाभ हुआ है; लेकिन कारखाना उत्सर्जन दूषित वायु वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है. इससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है. कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने से वातावरण का तापमान बढ़ता है. इससे आने वाले दिनों में मौसम में आमूल परिवर्तन आएगा. भोपाल में विनाशकारी वाष्प से होने वाली क्षति अद्वितीय है. वायुमंडल के तापमान में वृद्धि के कारण, मेरु क्षेत्र में बर्फ के पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा और तटीय शहरी और औद्योगिक क्षेत्र जलमग्न हो जाएंगे और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएंगे. वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की चेतावनी को अब से ध्यान में रखा जाना चाहिए.

वायु प्रदूषण की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है. यह हर जगह हर किसी को प्रभावित करता है. अत्यधिक वाहनों की आवाजाही के कारण जानलेवा प्रदूषण की समस्या पैदा हो गई है. वायु प्रदूषण से मस्तिष्क की कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं. महानगरीय क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या बहुत तीव्र है.

फैक्टरी के तरल, ठोस अपशिष्ट और सार्वजनिक के कचरे से पर्यावरण प्रदूषण होता है जिससे जल और भूमि प्रभावित होता है. पॉलिथीन और प्लास्टिक के कारण होने वाले मिट्टी प्रदूषण ने आज सिरदर्द पैदा कर दिया है.

प्रदूषण का नियंत्रण

आज, दुनिया पर्यावरण प्रदूषण के खतरों से अवगत है. इसे नियंत्रित करने के लिए मानव समाज आगे आ रहा है. पहला, जनसंख्या वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना हमारा कर्तव्य है. पर्यावरण पर चल रहे उत्पीड़न से सृष्टि का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है. इसलिए वनीकरण से ग्रीन हाउस गैसों के दुष्प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है. इसके अलावा, सभी को यह याद रखना चाहिए कि प्रकृति मानव नियंत्रण में नहीं है; बल्कि मनुष्य प्रकृति का गुलाम है. इस भावना को पर्यावरण संरक्षण द्वारा पूरक किया जा सकता है.

पर्यावरण प्रदूषण के रोगों से छुटकारा पाने के लिए सार्वजनिक जागरूकता –  दवाओं का उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है. इसलिए स्वैच्छिक संगठनों, युवा संगठनों, महिलाओं के मंडलियों, स्कूलों और कॉलेजों के छात्र पर्यावरण और सुरक्षा के संदेश को ग्रामीण, शहरी, शैक्षिक और धार्मिक संस्थानों में फैला सकते हैं. यह सब में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है. छात्रों की पाठ्यपुस्तकों में पर्यावरणीय पाठ शामिल होना चाहिए. वन कर्मियों की इस मामले में भी जिम्मेदारियां हैं.

पर्यावरण संरक्षण आज एक लोकप्रिय आंदोलन बन गया है. हमें प्रदूषण के ऐसे खतरों से लड़ने के लिए अथक उत्साह और प्रयास के साथ काम करना होगा. प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का पालन किया जाना चाहिए. दुनिया के हर देश को सतर्क रहने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहल करने की आवश्यकता है. अपने देश को विनाश के कगार से बचाने के लिए आज सभी को आगे आना होगा.

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध | essay on environment pollution in hindi

समय समय पर हमें छोटी कक्षाओं में या बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में निबंध लिखने को दिए जाते हैं। निबंध हमारे जीवन के विचारों एवं क्रियाकलापों से जुड़े होते है। आज hindiamrit.com   आपको निबंध की श्रृंखला में  पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध | essay on environment pollution in hindi प्रस्तुत करता है।

इस निबंध के अन्य शीर्षक / नाम

(1) पर्यावरण प्रदूषण से हानियां पर निबंध (2) पर्यावरण प्रदूषण एवं संरक्षण पर निबंध (3) environment pollution essay in hindi (4) पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर निबंध

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पहले जान लेते है पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध | essay on environment pollution in hindi की रूपरेखा ।

निबंध की रूपरेखा

(1) प्रस्तावना (2) प्रदूषण का अर्थ (3) प्रदूषण के प्रकार (क) वायु प्रदूषण    (ख)  जल प्रदूषण   (ग)  ध्वनि प्रदूषण     (घ)  रेडियोधर्मी प्रदूषण  (ङ)  रासायनिक प्रदूषण (4) प्रदूषण की समस्या तथा उस से हानियां (5) समस्या का समाधान (6) उपसंहार

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जो हमें चारों ओर से परिवृत किये हुए है, वही हमारा पर्यावरण है। इस पर्यावरण के प्रति जागरूकता आज को प्रमुख आवश्यकता है; क्योंकि यह प्रदूषित हो रहा है।

प्रदूषण की समस्या प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के लिए अज्ञात थी। यह वर्तमान युग में हुई औद्योगिक प्रगति एवं शस्त्रास्त्रों के निर्माण के फलस्वरूप उत्पन्न हुई है।

आज इसने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि इससे मानवता के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया है। मानव-जीवन मुख्यत: स्वच्छ वायु और जल पर निर्भर है।

किन्तु यदि ये दोनों ही चीजें दूषित हो जाएँ तो मानव के अस्तित्व को ही भय पैदा होना स्वाभाविक है; अत: इस भयंकर समस्या के कारणों एवं उनके निराकरण के उपायों पर विचार करना मानवमात्र के हित में है ।

ध्वनि-प्रदूषण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता रॉबर्ट कोच ने कहा था, “एक दिन ऐसा आएगा जब मनुष्य को स्वास्थ्य के सबसे बड़े शत्रु के रूप में निर्दयी शोर से संघर्ष करना पड़ेगा।” लगता है कि वह दुःखद दिन अब आ गया है।

प्रदूषण का अर्थ

स्वच्छ वातावरण में ही जीवन का विकास सम्भव है। पर्यावरण का निर्माण प्रकृति के द्वारा किया गया है । प्रकृति द्वारा प्रदत्त पर्यावरण जीवधारियों के अनुकूल होता है।

जब इस पर्यावरण में किन्हीं तत्त्वों का अनुपात इस रूप में बदलने लगता है, जिसका जीवधारियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पडने की सम्भावना होती है तब कहा जाता है कि पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

यह प्रदूषित वातावरण जीवधारियों के लिए अनेक प्रकार से हानिकारक होता है।

जनसंख्या की असाधारण वृद्धि एवं औद्योगिक प्रगति ने प्रदूषण की समस्या को जन्म दिया है और आज इसने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि इससे मानवता के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया है ।

औद्योगिक तथा रासायनिक कूड़े-कचरे के ढेर से पृथ्वी, वायु तथा जल प्रदूषित हो रहे हैं।

प्रदूषण के प्रकार

आज के वातावरण में प्रदूषण निम्नलिखित रूपों में दिखाई पड़ता है-

(क) वायु-प्रदूषण

वायु जीवन का अनिवार्य स्रोत है। प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ रूप से जीने के लिए शुद्ध वायु की आवश्यकता होती है, जिस कारण वायुमण्डल में इसका विशेष अनुपात होना आवश्यक है ।

जीवधारी साँस द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइ-ऑक्साइड छोड़ता है। पेड़-पौधे कार्बन डाइ-ऑक्साइड ग्रहण करते हैं और हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

इससे वायुमण्डल में शुद्धता बनी रहती है, परन्तु मनुष्य की अज्ञानता और स्वार्धी प्रवृत्ति के कारण आज वृक्षों का अत्यधिक कटाव हो रहा है|

घने जंगलों से ढके पहाड़ आज नंगे दीख पड़ते हैं। इससे ऑक्सीजन का सन्तुलन बिगड़ गया है और वायु अनेक हानिकारक गैसों से प्रदूषित हो गयी है।

इसके अलावा कोयला, तेल, धातुकरणों तथा कारखानों की चिमनियों के धुएँ से वायु में अनेक हानिकारक गैसे भर गयी हैं, जो फेफड़ों के लिए अत्यन्त घातक है।

(ख) जल-प्रदूषण

जीवन के अनिवार्य स्रोत के रूप में वाय के बाद प्रथम आवश्यकता जल की ही हाता है। जल का जीवन कहा जाता है।

जल का शुद्ध होना स्वस्थ जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। फिर भी हम देखते हैं कि बड़े-बड़े नगरों के गन्दे नाले तथा सीवरों को नदियों से जोड़ दिया जाता है।

विभिन्न ओद्योगिक व घरेलू स्त्रोतों से नदियों व अन्य जल-स्रोतों में दिनों-दिन प्रदूषण पनपता जा रहा है। तालाबों, पोखरों व नदियों में जानवरों की नहलाना, मनुष्यों एवं जानवरों के मृत शरीर को जल में प्रवाहित करना आदि ने जल -प्रदूषण में बेतहाशा वृद्धि की है।

कानपुर, आगरा, मुम्बई, अलीगढ़ और न जाने कितने नगरों के कल-कारखानों का कचरा गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों को प्रदूषित करता हुआ सागर तक पहुंच रहा है।

(ग) ध्वनि-प्रदूषण

ध्वनि-प्रदूषण आज की एक नयी समस्या है । इसे वैज्ञानिक प्रगति ने पैदा किया है ।

मोटरकार, ट्रैक्टर, जेट विमान, कारखानों के सायरन, मशीनें, लाउडस्पीकर आदि ध्वनि के सन्तुलन को बिगाड़कर ध्वनि-प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।

तेज ध्वनि से श्रवण-शक्ति का हृरास तो होता ही है साथ ही कार्य करने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ पैदा हो जाती है । अत्यधिक ध्वनि-प्रदूषण से मानसिक विकृति तक हो सकती है।

(घ) रेडियोधर्मी प्रदूषण

आज के युग में वैज्ञानिक परीक्षणों का जोर है। परमाणु परीक्षण निरन्तर होते ही रहते हैं।

इनके विस्फोट से रेडियोधर्मी पदार्थ वायुमण्डल में फैल जाते हैं और अनेक प्रकार से जीवन को क्षति पहुँचाते हैं।

दूसरे विश्व-युद्ध के समय हिरोशिमा और नागासाकी में जो परमाणु बम गिराये गये थे, उनसे लाखों लोग अपंग हो गये थे और आने वाली पीढ़ी भी इसके हानिकारक प्रभाव से अभी भी अपने को बचा नहीं पायी है।

(ङ) रासायनिक प्रदूषण

कारखानों से बहते हुए अवशिष्ट द्रव्यो के अतिरिक्त उपज में वृद्धि की दृष्टि से प्रयुक्त कीटनाशक दवाइयों और रासायनिक खादो से भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

ये पदार्थ जल के साथ बहकर नदियों, तालाबों और अन्ततः समुद्र में पहुँच जाते हैं और जीवन को अनेक प्रकार से हानि पहुँचाते हैं।

प्रदूषण की समस्या तथा उससे हानियां

निरन्तर बढ़ती हुई मानव-जनसंख्या, रेगिस्तान का बढ़ते जाना, भूमि का कटाव, ओजोन की परत का सिकुड़ना, धरती के तापमान में वृद्धि, वनों के विनाश तथा औद्योगीकरण ने विश्व के सम्मुख प्रदूषण की समस्या पैदा कर दी हैं।

कारखानों के धुएँ से, विषैले कचरे के बहाव से तथा जहरीली गैसों के रिसाव से आज मानव-जीवन समस्याप्रस्त हो गया है ।

आज तकनीकी ज्ञान के बल पर मानव विकास की दौड़ में एक-दूसरे से आगे निकल जाने की होड़ में लगा हुआ है।

इस होड़ में वह तकनीकी ज्ञान का ऐसा गलत उपयोग कर रहा है, जो सम्पूर्ण मानव-जाति के लिए विनाश का कारण बन सकता है।

युद्ध में आधुनिक तकनीकों पर आधारित मिसाइलों और प्रक्षेपास्त्रों ने जन-धन की अपार क्षति तो की ही है।

साथ ही पर्यावरण पर भी घातक प्रभाव डाला है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य में गिरावट, उत्पादन में कमी और विकास प्रक्रिया में बाधा आयी है वायु-प्रदूषण का गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव मनुष्यों एवं अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

सिरदर्द, ऑँखें दुखना, खाँसी, दमा, हृदय रोग आदि किसी-न-किसी रूप में वायु-प्रदूषण से जुड़े हुए हैं। प्रदूषित जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन-तन्त्र सम्बन्धी रोग उत्पन्न होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति वर्ष लाखों बच्चे दूषित जल पीने के परिणामस्वरूप उत्पन्न रोगों से मर जाते हैं। ध्वनि-प्रदूषण के भी गम्भीर और घातक प्रभाव पड़ते हैं।

ध्वनि-प्रदूषण (शोर) के कारण शारीरिक और मानसिक तनाव तो बढ़ता ही हैं, साथ ही श्वसन-गति और नाड़ी-गति में उतार-चढ़ाव, जठरान्त्र की गतिशीलता में कमी तथा रुधिर परिसंचरण एवं हृदय पेशी के गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है तथा प्रदूषण जन्य अनेकानेक बीमारियों से पीड़ित मनुष्य समय से पूर्व ही मृत्यु का ग्रास बन जाता है।

समस्या का समाधान

महान् शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने इस समस्या की ओर गम्भीरता से ध्यान दिया है। आज विश्व का प्रत्येक देश इस ओर सजग है । वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए वृक्षारोपण सर्वश्रेष्ठ साधन है ।

मानव को चाहिए कि वह वृक्षों और वनों को कुल्हाड़ियों का निशाना बनाने के बजाय उन्हें फलते-फूलते देखे तथा सुन्दर पशु-पक्षियों को अपना भोजन बनाने के बजाय उनकी सुरक्षा करे।

साथ ही भविष्य के प्रति आशंकित, आतंकित होने से बचने के लिए सबको देश की असीमित बढ़ती जनसंख्या को सीमित करना होगा, जिससे उनके आवास के लिए खेतों और वनों को कम न करना पड़े।

कारखाने और मशीने लगाने की अनुमति उन्हीं व्यक्तियों को दी जानी चाहिए, जो औद्योगिक कचरे और मशीनों के धुएँ को बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था कर सकें।

संयुक्त राष्ट् संघ को चाहिए कि वह परमाणु-परीक्षणों को नियन्त्रित करने की दिशा में कदम उठाए। तकनीकी ज्ञान का उपयोग खोये हुए पर्यावरण को फिर से प्राप्त करने पर बल देने के लिए किया जाना चाहिए।

वायु-प्रदूषण से बचने के लिए प्रत्येक प्रकार की गन्दगी एवं कचरे को विधिवत् समाप्त करने के उपाय निरन्तर किये जाने चाहिए।

जल-प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए औद्योगिक संस्थानों में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि व्यर्थ पदार्थों एवं जल को उपचारित करके ही बाहर निकाला जाए तथा इनको जल-स्रोतों से मिलने से रोका जाना चाहिए।

ध्वनि- प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए भी प्रभावी उपाय किये जाने चाहिए। सार्वजनिक रूप से लाउडस्पीकरों आदि के प्रयोग को नियन्त्रित किया जाना चाहिए।

पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण को रोकने व उसके समुचित संरक्षण के लिए समस्त विश्व में एक नयी चेतना उत्पन्न हुई है।

हम सभी का उत्तरदायित्व है कि चारों ओर बढ़ते इस प्रदूषित वातावरण के खतरों के प्रति सचेत हों तथा पूर्ण मनोयोग से सम्पूर्ण परिवेश को स्वच्छ व सुन्दर बनाने का यत्न करें।

वृक्षारोपण का कार्यक्रम सरकारी स्तर पर जोर-शोर से चलाया जा रहा है तथा बनों की अनियनंत्रित कटाई को रोकने के लिए भी कठोर नियम बनाये गये हैं।

इस बात के भी प्रयास किये जा रहे हैं कि नये बन-क्षेत्र बनाये जाएँ और जन-सामान्य को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

इधर न्यायालय द्वारा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को महानगरीं से बाहर ले जाने के आदेश दिये गये हैं तथा नये उद्योगों को लाइसेन्स दिथे जाने से पूर्व उन्हें औद्योगिक कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था कर पर्यावरण विशेषज्ञों से स्वीकृति प्राप्त करने को अनिवार्य कर दिया गया है ।

यदि जनता भी अपने ढंग से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग दे और यह संकल्प ले कि जीवन में आने वाले प्रत्येक शुभ अवसर पर कम-से-कम एक वृक्ष अवश्य लगाएगी तो निश्चित ही हम प्रदूषण के दुष्परिणामों से बच सकेंगे और आने वाली पीढ़ी को भी इसकी काली छाया से बचाने में समर्थ हो सकेंगे।

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Essay on Environmental Pollution in Hindi)

Paryavaran Pradushan Par Nibandh :- पर्यावरण का संरक्षण हमारे जीवन और समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे द्वारा किए गए गलत कार्यों और अवहेलना के कारण पर्यावरण को प्रदूषित करने की आशंका आज एक गंभीर समस्या बन गई है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य और सामरिक संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि यह पृथ्वी के सभी प्राणियों को भी पीड़ित करता है।

इस निबंध में, हम पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न प्रकार, उनके प्रभाव और इससे बचाव के उपायों पर चर्चा करेंगे। आइए, हम इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी ध्यान केंद्रित करें और पर्यावरण प्रदूषण के बारे में गहराई से जानें।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Environmental Pollution Essay in Hindi)

I. परिचय, a. पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ और महत्व:.

पर्यावरण प्रदूषण, वनस्पति, पशु-पक्षी, जलजीव और मानव जीवन के लिए हानिकारक और अस्वास्थ्यकर पदार्थों के प्रवाह को कहता है। यह उच्च मात्रा में विषाणु, धूल, धुएं, यातायात उद्योगों से उत्पन्न जहरीली गैसें, जल और जलवायु प्रदूषण के रूप में प्रकट होता है।

पर्यावरण प्रदूषण विभिन्न समस्याओं का कारण बनता है जैसे कि वनों की कटाई, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण आदि। पर्यावरण प्रदूषण का महत्व इसलिए है क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और पृथ्वी के समुदाय के लिए खतरा पैदा करता है।

B. निबंध का उद्देश्य:

इस निबंध का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण प्रदूषण के विषय में जागरूकता पैदा करना है और लोगों को इस समस्या के बारे में संवेदनशील बनाना है। यह निबंध हमें पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारणों, प्रभावों और उससे बचाव के उपायों के बारे में ज्ञान प्रदान करेगा।

इसके माध्यम से हमें पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्णता समझाई जाएगी और हम एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण के लिए सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

II. प्रकार

A. वायु प्रदूषण:.

1. वायुमंडल की प्रदूषण:

  • ऑजोन परत की कमी
  • ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव
  • हवा में विषाणुओं की मात्रा

2. वायुमंडल के प्रमुख गैसों का प्रदूषण:

  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का प्रदूषण
  • मेथेन (CH4) का प्रदूषण
  • नाइट्रस ऑक्साइड (NOx) का प्रदूषण

3. वायुमंडलीय परिवर्तन का प्रभाव:

  • आबू-धाबी प्रोटोकॉल का पालन
  • ओजोन सतह के प्रदूषण की समस्या
  • अमेरिकी वायुमंडलीय परिवर्तन कोष (EPA) के प्रयास

B. जल प्रदूषण:

1. जलमार्ग का प्रदूषण:

  • नियमित जलमार्ग के प्रदूषण
  • जल में उपयोगिता पदार्थों के प्रदूषण
  • जल संरचनाओं के प्रदूषण

2. नदियों और झीलों का प्रदूषण:

  • औद्योगिक अपशिष्टों का निकास
  • नदी किनारों के उपयोग में गंदगी
  • जलस्रोतों में जैविक प्रदूषण

3. पानी के उपयोग में गैरजिम्मेदारी:

  • नियमित स्वच्छता के महत्व
  • जल संरचनाओं का सुरक्षित उपयोग
  • जल संरक्षण के लिए जनता की सहभागिता

C. मृदा प्रदूषण:

1. कीटनाशकों और केमिकल्स का प्रयोग:

  • कीटनाशक प्रदूषण की समस्या
  • खेती में केमिकल्स का अत्यधिक उपयोग
  • मृदा की उपजाऊता की कमी

2. खेती में निरंतर उपयोग का प्रभाव:

  • मृदा की गुणवत्ता कम होना
  • पोषक तत्वों की कमी
  • जल प्रवाह में प्रदूषण का प्रसार

3. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी:

  • मिट्टी की क्षेत्रफली का प्रभाव
  • उपजाऊता की गिरावट
  • भूमि संरक्षण के लिए सावधानी की आवश्यकता

D. ध्वनि प्रदूषण:

1. उच्च ध्वनि के स्रोत:

  • उद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण
  • ट्रांसपोर्टेशन स्रोतों का प्रदूषण
  • निर्माण कार्यों का प्रदूषण

2. ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव:

  • मनोदौष्य
  • रोग और समस्याएं
  • प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने का प्रभाव

3. शोर प्रदूषण के समाधान:

  • शोर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कदम
  • ध्वनि नियमों का पालन
  • जनता की सहभागिता और जागरूकता

III. पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव

A. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव:.

  • वायु प्रदूषण के कारण होने वाली फेफड़े की बीमारियाँ
  • जल प्रदूषण के परिणामस्वरूप होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों के संक्रमण
  • मृदा प्रदूषण से होने वाली खाद्य सुरक्षा की समस्याएँ
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण मानसिक तनाव और नींद की समस्याएँ

B. पशुपक्षियों और पौधों पर प्रभाव:

  • वायु प्रदूषण के कारण पशुपक्षियों की बीमारियाँ और मृत्यु
  • जल प्रदूषण से नदियों, झीलों और मरुस्थलों के पानी की गुणवत्ता कम होती है
  • मृदा प्रदूषण के कारण मिट्टी की उपजाऊता कम होती है
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण पौधों की विकास में बाधाएँ और उत्पादन कम होता है

C. जलवायु परिवर्तन के कारण:

  • पर्यावरण प्रदूषण के कारण जलवायु परिवर्तन की गति बढ़ी है
  • वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण के प्रभाव से वनस्पतियों के लिए उचित मौसम और मृदा की आवश्यक गुणवत्ता कम होती है
  • मानव समुदायों को बाढ़, सूखे, तूफान और अन्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है

D. संपत्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रभाव:

  • पर्यावरण प्रदूषण के कारण भूमि, जल, और वायु संपत्ति पर नकारात्मक प्रभाव
  • जंगलों की कटाई और पर्यावरण के प्रदूषण के कारण जीवजंतुओं का नष्ट होना
  • पर्यावरणीय संतुलन के खतरे के कारण जीवजंतुओं के संरक्षण और प्रजनन में समस्याएँ

इस तरह से, पर्यावरण प्रदूषण विभिन्न तत्वों पर गंभीर प्रभाव डालता है, स्वास्थ्य समस्याओं को उत्पन्न करता है, जीवजंतुओं और पौधों को प्रभावित करता है, जलवायु परिवर्तन को तेजी से बढ़ाता है और संपत्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर असाधारण प्रभाव डालता है।

IV. पर्यावरण प्रदूषण के कारण

A. आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण का प्रभाव:.

  • औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के साथ, उच्च मात्रा में उत्पन्न होने वाले जहरीले उपादानों का प्रसार
  • विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले धुएं, ध्वनि और जल प्रदूषण
  • बढ़ती आवश्यकताओं के लिए पर्यावरण संसाधनों का अत्यधिक उपयोग

B. वनों की कटाई और विपणन का प्रभाव:

  • अनुमानित वृक्षारोपण क्षेत्रों की कटाई और वनों की हानि
  • जंगली जीवों के निवासस्थानों का नष्ट होना
  • जीवजंतुओं और पौधों के प्रजनन को प्रभावित करना

C. नगरीकरण का प्रभाव:

  • आबादी की बढ़ती मांग के साथ, उच्च यातायात और इमारतों के निर्माण से होने वाला प्रदूषण
  • सड़कों पर वाहनों के बढ़ते प्रवाह के कारण होने वाला वायु प्रदूषण
  • गंदगी, अवैध शौचालय और निपटान की कमजोरी से होने वाला जल प्रदूषण

D. अवैध शौचालय और गंदगी का प्रभाव:

  • अवैध शौचालयों से निकलने वाले मल का निपटान के अभाव में होने वाला जल प्रदूषण
  • गंदगी के संग्रह और प्रबंधन में कमजोरी से होने वाला वायु प्रदूषण
  • अवैध शौचालय और गंदगी के स्रोत से निकलने वाले अस्वास्थ्यकर पदार्थों का प्रसार

इन कारणों के संग्रह में, पर्यावरण प्रदूषण का आंतरिक और बाहरी प्रभाव देखा जा सकता है, जो इस समस्या के पीछे मुख्य कारक हैं। इसलिए हमें इन कारणों को समझना और उन्हें संघर्ष करने के उपाय ढूंढने की आवश्यकता है।

V. पर्यावरण प्रदूषण के निवारण के उपाय

A. पर्यावरण संरक्षण के महत्व:.

  • पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्णता को समझना
  • संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ पर्यावरण में सक्रिय भागीदारी

B. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारी उपाय:

1. उच्चाधिकारी नियंत्रण और कठोरता:

  • नियमों की सख्ती को बढ़ाना और उनका पालन करना
  • पर्यावरण प्रदूषण के लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान करना

2. वातावरण नियमों का पालन करना:

  • औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों में प्रदूषण नियमों का पालन करना
  • विभिन्न उद्योगों को प्रदूषण कम करने के लिए प्रोत्साहित करना

3. नगरीय और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन:

  • कचरे के ठीक संग्रह और प्रबंधन की व्यवस्था करना
  • अवैध शौचालयों का निष्पादन और स्वच्छता अभियानों का समर्थन करना

C. जनता के लिए उपाय:

1. उच्चाधिकारी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता:

  • नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण की जिम्मेदारी स्वीकारना
  • पर्यावरण के बारे में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाना

2. पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता:

  • स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को सम्मिलित करना
  • पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता अभियान चलाना

3. स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाना:

  • स्वच्छता का पालन करना और जहरीले पदार्थों को सही ढंग से निपटाना
  • जल संरक्षण को अपनाना और बागवानी और पौधों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना

इन उपायों के माध्यम से, पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकारी और जनता के सहयोग से कदम उठाए जा सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्णता को समझने और इसे अपनाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है ताकि हम स्वस्थ, सुरक्षित और सुंदर पर्यावरण में रह सकें।

VI. समापन

A. पर्यावरण प्रदूषण का घातकता पर प्रभाव:.

  • वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से मानव स्वास्थ्य, जीव जंतुओं और पौधों पर असाधारण विपरीत प्रभाव होता है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम परिवर्तन, बाढ़, सूखे और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि होती है।
  • पर्यावरणीय संतुलन के अस्थायीकरण के कारण पर्यावरण की संपत्ति और जीवजंतुओं के नष्ट होने का खतरा होता है।

B. संभावित समाधान और संरक्षण के मार्ग:

  • सशक्त सरकारी नीतियों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण का समर्थन करना।
  • जलवायु परिवर्तन के लिए ग्लोबल स्तर पर समझौतों को संबंधित देशों के बीच करना।
  • पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए वन संरक्षण और पौधों के बागवानी को प्रमुखता देना।
  • जनता को पर्यावरण संरक्षण में जागरूकता और सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

C. व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी:

  • हर व्यक्ति को अपने पर्यावरण पर जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
  • स्वच्छता, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण और पौधों के प्रति संवेदनशीलता जैसे छोटे कदम लेने चाहिए।
  • सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों को पर्यावरण जागरूकता अभियानों को संचालित करने में सहायता करनी चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण समस्या के समाधान के लिए सरकारी और सामाजिक जिम्मेदारी का मिलन सबसे महत्वपूर्ण है। हम सभी को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देना चाहिए। इस तरह से हम संघर्ष करके स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण का निर्माण कर सकते हैं जो हमारे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 100 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण विश्वभर में एक गंभीर समस्या है। वायु, जल, मृदा, और ध्वनि प्रदूषण का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य, पशुपक्षियों, पौधों, और जलवायु परिवर्तन पर होता है। आधुनिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण, और अवैध शौचालय इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।

प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, और संज्ञान सुधारक उपायों के माध्यम से हम इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। सरकार, जनता, और सभी व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी लेकर हम स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 150 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण आजकल एक गंभीर समस्या है जो हमारे नगरों, क्षेत्रों और पूरे विश्व को प्रभावित कर रही है। यह वायु, जल, मृदा, और ध्वनि माध्यम से होता है और मानव स्वास्थ्य, पशुपक्षियों, पौधों, और जलवायु परिवर्तन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण, और अवैध शौचालय।

प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारी नीतियां, पर्यावरण संरक्षण, और जनता के साझा प्रयास आवश्यक हैं। सरकार को प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण, और वन संरक्षण के लिए सख्त नीतियों को लागू करना चाहिए। जनता को उच्चाधिकारियों के साथ सहयोग करना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण में जागरूकता फैलानी चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर, हमें स्वच्छता, ऊर्जा संरक्षण, और प्रदूषण मुक्त उपाय अपनाने की जिम्मेदारी है।

पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए हमें संघर्ष करना होगा और एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण की रक्षा करनी होगी, जो हमारे भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 200 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जो पूरे विश्व को घेर रही है। यह मानव स्वास्थ्य, जीव जंतुओं, पौधों और जलवायु परिवर्तन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण इसके प्रमुख प्रकार हैं।

इसके पीछे कारण आधुनिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण, अवैध शौचालय और उद्योगीकरण का प्रभाव है। प्रदूषण के प्रभावों में मानव स्वास्थ्य की खराबी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पशुपक्षियों और पौधों पर प्रभाव, और पर्यावरणीय संतुलन के हानि शामिल है।

प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सक्रिय उपाय अपनाने की आवश्यकता है। सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियों को लागू करना चाहिए और जनता को जागरूक करना चाहिए। वन संरक्षण, जल संरक्षण, और ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए सभी को योगदान देना चाहिए।

व्यक्तिगत स्तर पर, हमें स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। हमारा एक सामूहिक प्रयास हमें स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण की सुरक्षा में मदद करेगा जो हमारे भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदूषण के समाधान की ओर हमारा संघर्ष एक प्रगतिशील और जीवनयापन भरा भविष्य बनाने के लिए आवश्यक है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 300 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण आजकल एक चिंता का विषय बन गया है। यह एक समस्या है जो पूरे विश्व को प्रभावित कर रही है और हमारे नगरों, क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को अधिकारियों के साथ प्रभावित कर रही है। पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ है वातावरण में विभिन्न विषाणुओं, ध्वनि, थर्मल और उदासीन पदार्थों के निकालने के कारण विशेष प्रदूषक पदार्थों के बाहरी रूपों में जीवों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभावों को सूचित करना।

प्रदूषण के प्रमुख प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण हैं। वायु प्रदूषण में वायुमंडल की प्रदूषण, प्रमुख गैसों का प्रदूषण और वायुमंडलीय परिवर्तन के प्रभाव शामिल होते हैं। जल प्रदूषण में जलमार्ग का प्रदूषण, नदियों और झीलों का प्रदूषण और पानी के उपयोग में गैरजिम्मेदारी का प्रभाव होता है।

मृदा प्रदूषण में कीटनाशकों और केमिकल्स का प्रयोग, खेती में निरंतर उपयोग का प्रभाव और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी शामिल होती है। ध्वनि प्रदूषण में उच्च ध्वनि के स्रोत, ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव और शोर प्रदूषण के समाधान शामिल होते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव व्यक्तिगत, सामाजिक, और पर्यावरणीय होते हैं। इसका मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव होता है, पशुपक्षियों और पौधों पर असाधारण प्रभाव पड़ता है, जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम परिवर्तन होता है और संपत्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रदूषण से निपटने के लिए हमें सरकारी और जनता के सहयोग की आवश्यकता है। सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियों को लागू करना चाहिए, वन संरक्षण, पानी की संरक्षण और प्रदूषण कम करने के लिए जागरूकता अभियानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

जनता को जागरूक होना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी लेनी चाहिए। यहां तक कि हर व्यक्ति को स्वच्छता की जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण एक जीवनशैली में बदलाव की आवाज है और हमें इससे निपटने के लिए जिम्मेदारी संगठित करनी चाहिए। हमारा संयमी और जीवनयापन भरा व्यवहार पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है ताकि हम एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण में रह सकें।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण आजकल वैश्विक स्तर पर एक गंभीर समस्या बन गयी है। यह समस्या हमारे प्राकृतिक संसाधनों, वातावरण और मानव स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है। पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है वातावरण में विभिन्न विषाणुओं, ध्वनि, उदासीन पदार्थों और थर्मल विकिरणों के बाहरी रूपों में जीवों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालना।

प्रदूषण के प्रमुख प्रकार हैं वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। वायु प्रदूषण के कारण वायुमंडल की प्रदूषण, प्रमुख गैसों का प्रदूषण और वायुमंडलीय परिवर्तन के प्रभाव शामिल होते हैं।

जल प्रदूषण में जलमार्ग के प्रदूषण, नदियों और झीलों के प्रदूषण और पानी के उपयोग में गैरजिम्मेदारी का प्रभाव होता है। मृदा प्रदूषण में कीटनाशकों और केमिकल्स का प्रयोग, खेती में निरंतर उपयोग का प्रभाव और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी शामिल होती है। ध्वनि प्रदूषण में उच्च ध्वनि के स्रोत, ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव और शोर प्रदूषण के समाधान शामिल होते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रभावों को व्यक्तिगत, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप में विभाजित किया जा सकता है। इसका मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव होता है, पशुपक्षियों और पौधों पर असाधारण प्रभाव पड़ता है, जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम परिवर्तन होता है और संपत्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से, वायु प्रदूषण से श्वास के रोग, ध्वनि प्रदूषण से श्रोत के रोग, और जल प्रदूषण से मृदा और जलमार्ग के संकट उत्पन्न होते हैं।

प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारी और जनता के सहयोग की आवश्यकता होती है। सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियों को लागू करना चाहिए, वन संरक्षण, पानी की संरक्षण, और वातावरण संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।

जनता को जागरूक होना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी लेनी चाहिए। शिक्षा, संगठन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान विकसित करने चाहिए जो पर्यावरणीय संरक्षण पर महत्वपूर्ण जागरूकता बढ़ाएगा।

पर्यावरण प्रदूषण एक व्यापक समस्या है जिसे हमें गंभीरता से लेना चाहिए। हमारे आदर्श जीवनशैली, ऊर्जा संरक्षण, और प्रदूषण मुक्त तकनीकों का उपयोग करके हम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

हमारे एक संगठनित प्रयास से हम एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण में रह सकते हैं, जो हमारे भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदूषण के समाधान की ओर हमारा संघर्ष एक प्रगतिशील और संवेदनशील भविष्य की ओर ले जाएगा।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 10 लाइन

  • पर्यावरण प्रदूषण आजकल एक चिंता का विषय बन गया है।
  • इसका मतलब है वातावरण में विभिन्न विषाणुओं और पदार्थों के निकालने के कारण जीवों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालना।
  • वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण प्रमुख प्रकार हैं।
  • प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य, पशुपक्षियों, पौधों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • प्रदूषण के कारण आधुनिकीकरण, वन कटाई, नगरीकरण और अवैध शौचालय शामिल होते हैं।
  • सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियाँ बनानी चाहिए।
  • जनता को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी लेनी चाहिए।
  • शिक्षा, जागरूकता और स्वच्छता के माध्यम से हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं।
  • हमें ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए और प्रदूषण मुक्त तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
  • हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाना चाहिए ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित और स्वच्छ रहे।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 15 लाइन

  • पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है।
  • इसका अर्थ होता है वातावरण में अनुपयुक्त पदार्थों के निकालने से जीवों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव होना।
  • प्रदूषण के कारण मानव स्वास्थ्य, पशु-पक्षियों और पौधों को नुकसान पहुंचता है।
  • औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण और अवैध शौचालय प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
  • सरकार को कठोर नीतियों का पालन करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कठोरता बढ़ाने की जरूरत है।
  • जनता को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
  • नगरिकों को उच्चाधिकारियों के साथ सहयोग करना चाहिए और प्रदूषण नियमों का पालन करना चाहिए।
  • बिजली, पानी और ऊर्जा की बचत करने के साथ हम पर्यावरण को संरक्षित रख सकते हैं।
  • वन संरक्षण और पौधों की रोपण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • अवैध शौचालयों का निर्माण रोकना और स्वच्छता का पालन करना जरूरी है।
  • उच्च ध्वनि स्रोतों को नियंत्रित करना और ध्वनि प्रदूषण को कम करना चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसंचार और जागरूकता को बढ़ावा देना चाहिए।
  • हम सभी को मिलकर प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ वातावरण के लिए संघर्ष करना चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 20 लाइन

  • पर्यावरण प्रदूषण हमारे आसपास की वातावरणिक स्थिति को खराब करने वाली एक गंभीर समस्या है।
  • वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण इसमें से प्रमुख प्रकार हैं जो हमारे पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
  • वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और ध्वनि प्रदूषण से हमारी श्रवण क्षमता प्रभावित होती है।
  • जल प्रदूषण के कारण प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा और जीव-जंतुओं के जीवन के लिए खतरा होता है।
  • मृदा प्रदूषण के कारण फसलों में कमी होती है और पृथ्वी की संरचना नष्ट होती है।
  • प्रदूषण के प्रमुख कारणों में औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण और अवैध शौचालय शामिल होते हैं।
  • सरकार को कठोर नीतियों का पालन करना चाहिए और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उच्चाधिकारी नियंत्रण और कठोरता बढ़ानी चाहिए।
  • जनता को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और नगरीय और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन करना चाहिए।
  • विद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए ताकि बच्चे पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझ सकें।
  • ऊर्जा संरक्षण और अकीकरण के लिए नवाचारी तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
  • प्रदूषण मुक्त यातायात और संगठित गुबार व्यवस्था जैसे साधारित उपाय अपनाने चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए संगठित कूदे और वास्तविक अपशिष्ट प्रबंधन करना आवश्यक है।
  • जल संरक्षण के लिए बारिश के पानी को संग्रहित करना चाहिए और बागवानी, पेड़-पौधों की रखरखाव करना चाहिए।
  • ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ उच्च ध्वनि स्रोतों को नियंत्रित करना चाहिए।
  • वन संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए वन समुदायों को समर्थन देना चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसंचार, जागरूकता और शिक्षा अभियान चलाने चाहिए।
  • उद्योगों को अधिकतम प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण मिति का पालन करना चाहिए।
  • इंदौरीय और वातावरणीय प्रदूषण के खिलाफ सचेत और संवेदनशील बनना चाहिए।
  • प्रदूषण को कम करने के लिए उद्यमों को अक्सर मान्यताएं देनी चाहिए।
  • हम सभी को एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्ष करना चाहिए ताकि हमारी भविष्य की सुरक्षा हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

पर्यावरण प्रदूषण क्या है.

पर्यावरण प्रदूषण वह प्रक्रिया है जिसमें वायु, जल, मृदा और ध्वनि के माध्यम से अनुपयुक्त पदार्थों का निकालना होता है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?

पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के क्या प्रभाव हो सकते हैं?

पर्यावरण प्रदूषण के कारण मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है, पशुपक्षियों, पौधों और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

पर्यावरण प्रदूषण के क्या कारण हो सकते हैं?

पर्यावरण प्रदूषण के कारण आधुनिकीकरण, वनों की कटाई, नगरीकरण, अवैध शौचालय और अनुचित गंदगी निकालना शामिल हो सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कठोर नीतियों का पालन करना चाहिए और जनता को जागरूक बनाना चाहिए। संगठन कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता होती है।

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हमें यातायात में शेयरी और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए, प्रदूषणमुक्त ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए और पौधों को रोपना चाहिए।

जल प्रदूषण कैसे रोका जा सकता है?

जल प्रदूषण को रोकने के लिए हमें नदियों और झीलों में अपशिष्ट निकालना रोकना चाहिए, जल संचय की व्यवस्था करनी चाहिए, और जल बचाव के लिए संगठित कूदा प्रबंधन करना चाहिए।

मृदा प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है?

मृदा प्रदूषण को कम करने के लिए हमें कीटनाशकों और केमिकल्स के अनुचित प्रयोग से बचना चाहिए, वापसीय खेती के उपयोग को बढ़ाना चाहिए, और मिट्टी की पोषकता को बनाए रखना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है?

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए हमें उच्च ध्वनि स्रोतों को नियंत्रित करना चाहिए, शोर प्रदूषण के समाधान को ढ़ूँढ़ना चाहिए, और ध्वनि कम करने के लिए नवाचारी तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण के निराकरण के लिए हमारी सामाजिक जिम्मेदारी क्या है?

हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है कि हमें प्रदूषणमुक्त और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। हमें संगठन कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए, जागरूकता बढ़ानी चाहिए और संघर्ष करना चाहिए ताकि हमारी भविष्य की सुरक्षा हो सके।

प्रस्तुतकर्ता Alex Thompson

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध: प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई दिशा की ओर बढ़ते हुए, हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए आदर्श तकनीकी और नैतिक मूल्यों को मिलाने का संकल्प बनाना होगा। विशेषज्ञता के साथ, हमें व्यक्तिगत संवेदनशीलता और सामाजिक सहयोग के साथ तकनीकी उपायों का अध्ययन करना होगा ताकि हम एक प्रदूषणमुक्त भविष्य की ओर अग्रसर ह सकें।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, 156 शहरों में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब रही थी। इसमें तीन शहर थे जिनकी हवा बहुत खराब थी, जिसका मतलब है कि उन शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से अधिक था। इसके अलावा, 21 अन्य शहरों की हवा की गुणवत्ता भी खराब श्रेणी में थी। प्रदूषण एक जटिल समस्या है जिसका समाधान विज्ञानिक दृष्टि से होना चाहिए, क्योंकि यह पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण का मतलब है – प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना, जिससे वायुमंडल, जल, और खाद्य में दोषिति होती है। प्रदूषण कई प्रकार का होता है, जिसके विस्तार से वर्णन Essay on Pollution in Hindi में किया गया है।

प्रदूषण पर निबंध 100 शब्द (Pollution Essay 100 Words in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi) प्रदूषण आजकल एक गंभीर समस्या बन चुका है। उद्योगीकरण और शहरीकरण की तेजी ने पर्यावरण को प्रदूषित कर दिया है, जिसमें हवा, पानी, और मिट्टी शामिल हैं। वनों की कटाई और औद्योगिकीकरण के कारण, हवा अत्यधिक प्रदूषित हो रही है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। आज सभी जल स्रोत अत्यधिक प्रदूषित हैं। कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है। पटाखों, लाउडस्पीकरों आदि का प्रयोग हमारी सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है। प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके कारण हमें सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, हृदय की समस्याएँ, फेफड़ों के कैंसर, हैजा, टाइफाइड, बहरापन, आदि का सामना करना पड़ता है। प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। हमें इस मुद्दे को गंभीरता और जागरूकता के साथ देखना होगा।

प्रदूषण पर निबंध 200 शब्द (Pollution Essay 200 Words in Hindi)

प्रदूषण का सीधा संबंध प्रकृति से मानते हैं, लेकिन यह सिर्फ किसी भी एक चीज़ को होने वाली हानि या नुकसान से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि उन सभी प्राकृतिक संसाधनों को खराब करने या व्यर्थ करने से है जो हमें प्रकृति ने बड़े ही सौंदर्य के साथ सौंपे हैं।

यह कहावत हम सबने सुनी और पढ़ी है कि जैसा व्यवहार हम प्रकृति के साथ करेंगे, वैसा ही बदले में हमें प्रकृति से मिलेगा। मिसाल के तौर पर हम कोरोनाकाल के लॉकडाउन के समय को याद कर सकते हैं कि किस प्रकार प्रकृति की सुंदरता देखी गई थी, जब मानव निर्मित सभी चीज़ें (वाहन, फैक्ट्रियाँ, मशीनें आदि) बंद थीं और भारत में प्रदूषण का स्तर कुछ दिनों के लिए काफी कम हो गया था या कहें तो, लगभग शून्य ही हो गया था।

इस उदाहरण से एक बात तो पानी की तरह साफ है कि समय-समय पर हो रहीं प्राकृतिक घटनाओं, आपदाओं, महामारियों आदि के लिए ज़िम्मेदार केवल-और-केवल मनुष्य ही है। जब भी हम प्रकृति या प्राकृतिक संसाधनों की बात करते हैं, तो उनमें वो सभी चीज़ें शामिल हैं जो मनुष्य को ईश्वर या प्रकृति से वरदान के रूप में मिली हैं।

इनमें वायु, जल, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, नदियाँ, वन, पहाड़ आदि चीज़ें शामिल हैं। मनुष्य होने के नाते इन सभी प्राकृतिक चीज़ों और संसाधनों की रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। प्रकृति हमारी

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प्रदूषण पर निबंध 300 शब्द (Pollution Essay 300 Words in Hindi)

बचपन में हम जब भी गर्मी की छुट्टियों में अपने दादी-नानी के घर जाते थे, तो हर जगह हरियाली ही हरियाली फैली होती थी। हरे-भरे बाग-बगिचों में खेलना बहुत अच्छा लगता था। चिड़ियों की चहचहाहट सुनना बहुत अच्छा लगता था। अब वैसा दृश्य कहीं दिखाई नहीं देता।

आजकल के बच्चों के लिए ऐसे दृश्य केवल किताबों तक ही सीमित रह गये हैं। ज़रा सोचिए ऐसा क्यों हुआ। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य, जल, वायु, आदि सभी जैविक और अजैविक घटक मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। सभी का पर्यावरण में विशेष स्थान है।

प्रदूषण का अर्थ (Meaning of Pollution)

प्रदूषण, तत्वों या प्रदूषकों के वातावरण में मिश्रण को कहा जाता है। जब यह प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनों में मिलते हैं, तो इसके कारण कई नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होते हैं। प्रदूषण मुख्य रूप से मानव गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होता है और यह हमारे पर्यावरणीय संरचना को प्रभावित करता है। प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभावों के कारण मानवों के लिए छोटी-बड़ी बीमारियों से लेकर जीवन के अस्तित्व को खतरे में डालने वाली समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। मानवों ने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए पेड़ों की अनधिकारी कटाई की है, जिसके कारण पर्यावरण में असंतुलन हुआ है। प्रदूषण इस असंतुलन का मुख्य कारण भी है।

प्रदूषण है क्या ? ( What is Pollution ?)

जब वायु, जल, मृदा, और अन्य प्राकृतिक संसाधनों में अनचाहे तत्व घुलकर उन्हें इस प्रकार के रूप में गंदा कर देते हैं, जो स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगते हैं, तो उसे प्रदूषण कहा जाता है। प्रदूषण से प्राकृतिक संतुलन पर हानि पहुँचती है और मानव जीवन के लिए एक खतरा पैदा होता है।

मनुष्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसने जितनी अदरकऱी से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया है, जिससे पर्यावरण को हानि पहुँची है, उसे अब उतनी ही अकलमंदी से प्रदूषण की समस्या का समाधान ढूंढ़ना होगा। वनों के अधिक अनिवार्य कटाई भी प्रदूषण के कारकों में शामिल है, लेकिन इसे रोकने के लिए वृक्षारोपण की अधिक प्रक्रिया की आवश्यकता है। ऐसे कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

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अगर हमें अपनी आगामी पीढ़ी को एक साफ, सुरक्षित और जीवनदायिनी पर्यावरण देना है, तो हमें इस दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे। प्रदूषण को नियंत्रित करना हमारे देश के साथ-साथ पूरे विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि पूरी पृथ्वी पर जीवन का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। यही से हम सभी के लिए जीवन की सुरक्षा और पर्यावरण का संरक्षण संभव होगा।

प्रदूषण पर निबंध 500 शब्द (Pollution Essay 500 Words in Hindi)

इस दुनिया में भूमि, वायु, जल, और ध्वनि जैसे तत्वों का संतुलन महत्वपूर्ण है। यदि इनका संतुलन बिगड़ जाता है, तो पर्यावरण में असंतुलन बढ़ सकता है, और यही प्रदूषण का मुख्य कारण होता है। इस असंतुलन से फसलों, पेड़ों और अन्य चीजों पर भी असर पड़ता है।

इसके अलावा, हमारे द्वारा फेंके गए कचरे और कूड़े का भी पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है, और यह भी प्रदूषण का मुख्य कारण बनता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि “प्रदूषण” एक ऐसा अवांछित परिवर्तन होता है जिससे मानवों और अन्य जीवों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, और पर्यावरण की प्राकृतिक गुणवत्ता और उपयोगिता को नष्ट किया जाता है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्या है? (What is Air Quality Index (AQI)?)

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक महत्वपूर्ण मापक है जिसे सरकारी विभाग वायु प्रदूषण की स्तिथि को जांचने के लिए उपयोग करते हैं, ताकि लोग अपनी वायु गुणवत्ता को समझ सकें। AQI के बढ़ जाने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। यह सूचकांक लोगों को बताता है कि स्थानीय वायु गुणवत्ता उनके स्वास्थ्य पर कैसे प्रभाव डाल सकती है। AQI को पांच प्रमुख वायु प्रदूषकों की मॉनिटरिंग के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें ग्राउंड लेवल ओज़ोन, पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड शामिल हैं।

  • जमीनी स्तर की ओजोन (ग्राउंड लेवल ओज़ोन)
  • कण प्रदूषण/पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5/pm 10)
  • कार्बन मोनोऑक्साइड
  • सल्फर डाइऑक्साइड
  • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड

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प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण चार प्रकार का होता है, जो नीचे उल्लिखित है –

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)
  • ध्वनि प्रदूषण (Pollution Essay)
  • जल प्रदूषण (Water Pollution)
  • मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों के बारे में जानें:

वायु प्रदूषण: वायु प्रदूषण मुख्य रूप से वाहनों से गैस के उत्सर्जन के कारण होता है। इसके अलावा, कारखानों, उद्योगों, प्लास्टिक और पत्तियों के जहरीले पदार्थों को खुले में जलाने और रेफ्रीजरेशन उद्योग के सीएफ़सी से वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है।

ध्वनि प्रदूषण: सड़कों पर बढ़ी वाहनों की संख्या और ध्वनि प्रदूषण में भारी योगदान करते हैं। यह शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरनाक है और तनाव और चिंता के कारण हो सकता है।

जल प्रदूषण: कचरे को नदियों और समुद्रों में डालने के कारण जल प्रदूषण होता है। यह समुद्री जीवों के लिए हानिकारक है और पीने योग्य पानी की कमी का कारण बन सकता है।

मृदा प्रदूषण: कृषि और उद्योगों में रासायनिक उपायोग के कारण मिट्टी दूषित होती है, जिससे कृषि और प्रजनन में समस्याएँ होती हैं।

विशेष जानकारी: परमाणु युग में रेडियोधर्मी पदार्थों के उपयोग से रेडियोधर्मी प्रदूषण बढ़ा है, जिसके कारण तनाव और तंत्रिका रोग जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है। यह गर्मी को पृथ्वी के चारों ओर फैलाने वाले प्रदूषण के कारण होता है, जिसमें मनुष्य द्वारा जीवाश्म ईंधन जलाना, प्लास्टिक जलाना, वाहनों से निकलने वाली हानिकारक गैसेस, और जंगलों के जलने का शामिल होता है। यह प्रदूषण गर्मी को बढ़ावा देता है, जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा देता है। कार्बन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों का स्तर भी खतरनाक रूप से बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप आने वाली पीढ़ियाँ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों का सामना करेंगी।

हालांकि विभिन्न शहरों के अधिकारी प्रदूषण के मुद्दे पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन ऐसे में हम सभी नागरिकों और आम लोगों का भी यह कर्तव्य है कि हम इस प्रक्रिया में अपना योगदान दें। सभी प्रकार के प्रदूषण को रोकने के कुछ महत्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं –

पटाखों का इस्तेमाल बंद करें: त्योहार मनाते समय पटाखों का इस्तेमाल न करें। यह ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण का कारण बनता है और हमारे स्वास्थ्य पर भी दुश्मनीकारक प्रभाव डालता है।

वाहनों का प्रयोग सीमित करें: वाहन प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। वाहनों का प्रयोग कम से कम करें और सार्वजनिक परिवहन का प्रयास करें।

अपने आस-पास साफ-सफाई रखें: हमें अपने घर के आस-पास क्षेत्र को साफ-सुथरा रखना हमारी जिम्मेदारी है। कचड़ा कूड़ा फेंकने की बजाय, हमें कूड़ेदान में फेंकना चाहिए।

रिसाइकल और पुन: उपयोग करें: कई गैर-बायोडिग्रेडेबल उत्पाद हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, इन्हें ठीक से डिकम्पोज करें या रिसाइकल के लिए भेजें।

पेड़ लगाएं : पेड़ों की कटाई वातावरणिक प्रदूषण में वृद्धि का कारण बन रही है, इसलिए हमें अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का प्रयास करना चाहिए।

प्रदूषण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और हमें इसे समाधान के लिए साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि हम सभी और आने वाली पीढ़ियाँ, इस ग्रह पर सुरक्षित रूप से रह सकें।

Below are the related topics to pollution in English available at IL

  • Paragraph on Pollution in English
  • Essay on Pollution in English
  • Essay on Causes of Pollution
  • Article on Pollution
  • Types of Pollution

प्रदूषण निबंध 10 पंक्तियाँ (Pollution Essay 10 Lines in Hindi)

  • प्रदूषण विवादित प्राकृतिक संसाधनों को शामिल करने की प्रक्रिया है।
  • प्रदूषण के मुख्य प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण हैं।
  • प्राकृतिक प्रकोपों के साथ-साथ मानव गतिविधियाँ, दोनों प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।
  • प्रदूषण के प्राकृतिक कारण बाढ़, जंगलों के जलने और ज्वालामुखी जैसी घटनाएं हैं।
  • प्रदूषण एक ग्लोबल समस्या है, राष्ट्रीय नहीं।
  • प्रदूषण को रोकने के लिए पुन: उपयोग करना, कम करना और पुनर्चक्रण सबसे अच्छे उपाय हैं।
  • अम्ल वर्षा और ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण के परिणाम हैं।
  • प्रदूषण हमेशा जानवरों और इंसानों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • प्रदूषित हवा और पानी इंसानों और जानवरों में कई बीमारियों का कारण बनते हैं।
  • हम पर्यावरण के अनुकूल संसाधनों का उपयोग करके प्रदूषण को रोक सकते हैं, जैसे कि सौर पैनल।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध FAQs

हिंदी में प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखें.

प्रदूषण पर निबंध लिखने के लिए, आप प्रदूषण के प्रकार, कारण, प्रभाव, और निवारण के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध कैसे लिखें?

प्रदूषण की समस्या पर निबंध लिखने के लिए, आपको इसके कारण, प्रभाव, और समाधान के बारे में विस्तार से लिखना होगा।

प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?

प्रदूषण का मुख्य कारण है वाहनों, उद्योगों, और अन्य जैविक और अजैविक कारकों से निकलने वाले विषाणु, धूल, ध्वनि, और अन्य जलवायु प्रदूषक।

प्रदूषण का हम पर क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है, जैसे की डायरिया, ब्रॉन्काइटिस, और अन्य बीमारियाँ। इसके अलावा, यह पर्यावरण को भी हानि पहुंचाता है।

प्रदूषण के बारे में आप कैसे लिखते हैं?

मैं प्रदूषण के खतरों, उसके प्रकारों, और निवारण के उपायों के बारे में लिखता हूँ।

प्रदूषण को 100 शब्दों में क्या कहते हैं?

प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जिसमें वायु, पानी, और भूमि के प्रदूषक वातावरण को हानि पहुंचाते हैं। यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करता है।

प्रदूषण का निष्कर्ष क्या है?

प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सभी मिलकर काम करना होगा। हमें वायु, जल, और भूमि प्रदूषण को कम करने के लिए सावधानी से उपायों पर विचार करना होगा।

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Essay on Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में, Essay on Environmental Pollution in Hindi : पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है जो न केवल मनुष्यों के लिए वरन सम्पूर्ण जीवधारियों के लिए बेहद हानिकारक है। इसीलिए  पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध सभी छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निबंधों में से एक है। सभी छात्रों के  जरुरत के अनुसार हमने यहाँ पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध लिखा है जो लगभग 500 से 1000 शब्दों का है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध  हिंदी में : Essay on Environmental Pollution in Hindi

तेज रफ़्तार से बढ़ रही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या आने वाले दशक में सम्पूर्ण जीवधारिओं के भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है। अनेक प्रकार की जानलेवा एवं लाइलाज़ बीमारियों का प्रमुख कारण पर्यावरण प्रदूषण ही है। ऐसे में पर्यावरण प्रदूषण वैश्विक चिंता का विषय बन कर उभरा है। 

वह परिवेश जहाँ सभी सजीव और निर्जीव घटक निवास करते हैं, पर्यावरण कहलाता है। शहरीकरण, औद्योगीकरण, खनन, अन्वेषण आदि की बढ़ती मांग ने प्राकृतिक पर्यावरण के सामंजस्यपूर्ण संतुलन को असंतुलित कर दिया है। कई अवांछित मानवीय कार्य पर्यावरण को दिन प्रतिदिन प्रदूषित कर रहे हैं। ( पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध )

पर्यावरण प्रदूषण अर्थ : Meaning of Environmental Pollution in Hindi

मूल रूप से स्वस्थ पर्यावरण के लिए पर्यावरण में हर तत्व प्राकृतिक घटना के अनुसार उचित अनुपात में होना चाहिए। परन्तु जब कोई तत्व मानवीव गतिविधियों द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण में जोडी या घटायी जाती है तो यह पर्यावरण में घटकों के प्राकृतिक अनुपात को बदल देती है और इस प्रकार पर्यावरण दूषित हो जाता है। प्राकृतिक वातावरण में इस संदूषण को पर्यावरण प्रदूषण कहा जाता है। ( paryavaran pradooshan par nibandh )

पर्यावरण प्रदूषण के कारण: Causes of Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण ऐसी मानवीय गतिविधियां हैं जो पर्यावरण सुरक्षा का ध्यान दिए बिना की जाती हैं। पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति अब इतनी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है कि हवा और पानी जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते, काफी हद तक प्रदूषित हो चुके हैं। पर्यावरण प्रदूषण के सबसे प्रचलित कारण निम्नलिखित हैं:

  • उद्योग-धंधे
  • परिवहन
  • शहरीकरण
  • कृषि गतिविधियां
  • बढ़ती हुई जनसंख्या
  • प्राकृतिक कारण

उद्योग और पर्यावरण प्रदूषण: Environment pollution essay in hindi

औद्योगिक क्रांति की शुरुआत से ही उद्योग हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। उद्योगों में जीवाश्म ईंधन का बढ़ता उपयोग पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है। उद्योग-धंधे  मुख्य रूप से वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और  जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। उद्योगों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित करता है और हवा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है। उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ और कचरा और परिवहन के दौरान तेल का रिसाव जल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं । ( पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध )

परिवहन और पर्यावरण प्रदूषण : Paryavaran pradushan nibandh

विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ मानव ने यात्रा करने के लिए पशु शक्ति को त्याग दिया। वर्तमान में प्रचलित परिवहन प्रणाली के कारण पर्यावरण प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है जो मूल रूप से जीवाश्म ईंधन पर आधारित है। परिवहन के साधनों के रूप में हम स्कूटर, कार, बस, ट्रेन, हवाई जहाज का उपयोग कर रहे हैं। परिवहन के ये सभी साधन ईंधन के रूप में जीवाश्म ईंधन का उपयोग करते हैं जिससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित करता है। ( paryavaran pradushan nibandh )

शहरीकरण और पर्यावरण प्रदूषण : Essay on environmental pollution in hindi

शहरीकरण किसी जगह के विकास की एक प्रक्रिया है जो उस स्थान को एक शहर में बदल देती है। शहरी क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोग रोजगार और निवास के लिए आते हैं। शहरीकरण की प्रक्रिया के दौरान किसी स्थान को शहर में बदलने के लिए कई उद्योग स्थापित होते हैं जो प्रदूषक उत्सर्जित करते हैं। साथ ही शहर को विकसित करने के लिए उनके पेड़ पौधों को काट दिया जाता है। जिससे पर्यावरण को बहुत अधिक क्षति होती है। शहरी क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या के कारण कचरा भी प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक बन गया है । उचित कचरा और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नितांत आवश्यक है।

कृषि और पर्यावरण प्रदूषण : Paryavarn pradushan nibandh hindi

कृषि गतिविधियाँ मुख्य रूप से जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। यह फसलों के अधिक उत्पादन के लिए प्रयुक्त कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग के कारण होता है। प्रारंभ में, कीटनाशकों और उर्वरकों में उपयोग किए जाने वाले रसायन मिट्टी में जाते हैं और इसे प्रदूषित करते हैं। सिंचाई के दौरान ये रसायन पानी में मिल जाते हैं और जल को भी दूषित कर देते हैं। ( Essay on environmental pollution in Hindi )

बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कृषि गतिविधियाँ दिनों -दिन बढ़ती जा रही हैं। अधिकांश क्षेत्र में जहाँ पहले पेड़ पौधे लगे होते थे एवं बड़े बड़े जंगल होते थे उन्हें काटकर कृषि योग्य भूमि में तब्दील किया जा रहा है जो की पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न कर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Essay on Environmental Pollution in Hindi

समय की मांग: पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अति आवश्यक

पर्यावरण प्रदूषण का बढ़ता स्तर सभी मनुष्यों के साथ-साथ पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों के लिए विनाशकारी है। यह एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वस्थ पर्यावरण के महत्व को समझने का समय है। हम सभी को अपने पर्यावरण की रक्षा और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। (paryavaran pradushan nibandh)

आशा है कि आपको पर्यावरण प्रदूषण पर यह निबंध पसंद आया होगा । पर्यावरण प्रदूषण पर इस निबंध के बारे में अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स साझा कर कर सकते हैं। 

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  • पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

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पर्यावरण प्रदूषण निबंध 200 शब्द में

पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक समस्या है जो मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। कई दशकों से यह चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि इसके चलते प्रकृति में भयानक बदलाव देखने को मिले हैं जो आगे आने वाली पीढ़ियों की ज़िंदगी बदल कर रख सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण हवा, पानी, मिट्टी और अन्य स्रोतों सहित वातावरण में हानिकारक प्रदूषकों का आना है, जिससे जीवों और उनके परिवेश पर घातक प्रभाव डलता है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण, तापीय प्रदूषण और रेडियोधर्मी प्रदूषण सहित पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न प्रकार हैं। यह प्रदूषक विभिन्न स्रोतों से आ सकते हैं, जिनमें मानवीय गतिविधियाँ शामिल हैं जैसे टेक्निकल प्रक्रियाएँ, परिवहन, फैक्ट्री का प्रदूषण, खेती और प्राकृतिक आपदाएं।

पर्यावरण प्रदूषण के कई दुष्ट परिणाम होते हैं, जिससे इंसानों, जानवरों, जंगलों, जल-जीवन, हर किसी चीज़ पर गहरा असर पड़ता है। कुछ सालों में कई लोग इस विषय में बोलने के लिए आगे आये हैं जिससे वह पूरे विश्व में बदलाव ला सकें। पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों के बीच सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा फैलाई जा रही है और सरकारें नीतियों और विनियमों को लागू करके पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और रोकने के लिए प्रयास कर रही हैं।

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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्द- 

पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक मुद्दा है जो पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव जंतु को प्रभावित करता है। यह परिवहन, कूड़े, मानवीय गतिविधियों, प्राकृतिक आपदाओं, आदि का परिणाम है जिससे हानिकारक प्रदूषक वातावरण में छूटते हैं और जीवों के स्वास्थ्य को खतरे में डालते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है वायु प्रदूषण जो वाहनों, फैक्टरियों, धुएं, धूल, केमिकल गैस, आदि से होता है। वायु प्रदूषण सबसे जल्दी फैलता है और संक्रमित करता है जिससे मानव शरीर पर असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली और बीजिंग जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहरों में लोग वायु प्रदूषण के कारण घातक बीमारियों से जूँझते हैं।

जल प्रदूषण सीवेज निपटान, फैक्टरियों के केमिकल, कृषि प्रदूषण, आदि से होने वाला प्रदूषण है जिससे जलजनित रोग फैल सकते हैं। इससे जलीय जीवन को नुकसान तो होता ही है, साथ में जल की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जिससे यह मानव उपयोग के लिए असुरक्षित हो सकता है। हमारे देश की कई नदियां इस प्रदूषण से प्रभावित हैं जिससे उनका जल जीवन पूरी तरह ने नष्ट हो चुका है।

मृदा या मिट्टी का प्रदूषण मानव गतिविधियों जैसे इंडस्ट्रियल कूड़ा, खेती में कीटनाशकों का उपयोग, प्लास्टिक का इस्तेमाल, टेक्निकल कूड़ा, आदि से होता है। मिट्टी में जीवन होता है और एक मुठ्ठी मिट्टी में भी करोड़ों सूक्ष्म जीव होते हैं जो मिट्टी को उपजाऊ रखते हैं। मृदा प्रदूषण के कारण मिट्टी की उर्वरता निकल जाती है जिससे उसमें फसल को जीवन देने की ऊर्जा नहीं बचती जिससे मनुष्यों और पशुओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

ध्वनि प्रदूषण पर्यावरण प्रदूषण का एक अन्य रूप है जो मनुष्यों और जानवरों में सुनवाई हानि, तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यह यातायात, निर्माण और मशीनरी के कारण होता है। जैसे हवाई अड्डों या राजमार्गों के पास रहने वाले लोग निरन्तर ऊंची ध्वनि सुनते हैं जिससे उनके सुनने की शक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण कई लोगों को जिंदगी भर ध्वनि यंत्र के सहारे जीना पड़ता है। 

प्रकाश प्रदूषण अत्यधिक या अवांछित प्रकाश के कारण होने वाला प्रदूषण का एक रूप है, जो प्राकृतिक सूची को खराब कर सकता हैं। इससे वन्य जीवन और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डलता है। जैसे समुद्री कछुए जो अंडों से निकलते हैं सबसे चमकदार तारों को देखकर उनकी तरफ बढ़ने लगते हैं और समुद्र में जाकर अपना रास्ता ढूंढते हैं पर प्रकाश प्रदूषण के कारण हर साल हज़ारों कछुए इंसानी बस्तियों के प्रकाश की तरफ बढ़ते जाते हैं जिनकी वजह से समुद्र में नहीं जा पाते और उनकी मौत हो जाती है। इससे उनकी आबादी में गिरावट आती है।

पर्यावरण प्रदूषण से सिर्फ शारीर पर ही असर नहीं पड़ता बल्कि इसके मानसिक और भावनात्मक परिणाम भी हैं। पिछले कुछ सालों पूरे विश्व से कई देश इस विषय पर काम कर रहे हैं ताकि प्रदूषण को कम कर सकें और इसके प्रभावों को कम कर सकें। आखिरकार सारा प्रदूषण मानव गतिविधियों के कारण ही होता है। इसके बारे में सर्कट को ही नहीं बल्कि सभी लोगों को ठोस कदम लेने की ज़रूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ, सुंदर और सुरक्षित दुनिया दे सकें।

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Environment pollution essay in hindi (1000 words)

पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक मुद्दा है जो पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव जंतु को प्रभावित करता है। यह परिवहन, कूड़े, मानवीय गतिविधियों, प्राकृतिक आपदाओं, आदि का परिणाम है जिससे हानिकारक प्रदूषक वातावरण में छूटते हैं और जीवों के स्वास्थ्य को खतरे में डालते हैं। 

पर्यवरण प्रदूषण का स्तोत्र प्रकृतिक या मानवीय कारणों से होता है हालांकि ज्यादातर यह लोगों की गतिविधियों से ही होता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से परिवहन, औद्योगिक प्रक्रियाओं और ऊर्जा उत्पादन जैसी मानवीय गतिविधियों द्वारा हानिकारक गैसों और कणों को हवा में छोड़े जाने के कारण होता है।  इन प्रदूषकों से श्वसन संबंधी समस्याएं, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, विशेष रूप से कमजोर आबादी जैसे कि बच्चों और बुजुर्गों में।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि हर साल दुनिया भर में लगभग 4.2 मिलियन समय से पहले होने वाली मौतों के लिए बाहरी वायु प्रदूषण जिम्मेदार है।

वायु प्रदूषण का एक उदाहरण बीजिंग, चीन जैसे शहरों में स्मॉग है।  कोयले से चलने वाले उद्योगों और परिवहन पर शहर की भारी निर्भरता ने वायु प्रदूषण के अत्यधिक उच्च स्तर को जन्म दिया है, जिससे निवासियों और आगंतुकों के लिए समान रूप से स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं।  जवाब में, चीनी सरकार ने उत्सर्जन को कम करने और हवा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नीतियों को लागू किया है, जैसे कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और सड़क पर कारों की संख्या कम करना।

नदियों, झीलों और महासागरों में अनुपचारित अपशिष्ट जल और औद्योगिक कचरे के निर्वहन के कारण जल प्रदूषण होता है।  इससे जलजनित रोग फैल सकते हैं, जलीय जीवन को नुकसान हो सकता है और पेयजल स्रोतों का प्रदूषण हो सकता है।  संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 1.8 बिलियन लोग पीने के पानी के स्रोत का उपयोग करते हैं जो कि मल से दूषित होता है।

जल प्रदूषण का एक उदाहरण भारत में गंगा नदी का प्रदूषण है।  नदी को लाखों लोगों द्वारा एक पवित्र स्थल माना जाता है, लेकिन यह औद्योगिक कचरे और सीवेज निपटान से गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया है, जिससे जलजनित रोग और पर्यावरणीय गिरावट हो रही है।  इस मुद्दे को हल करने के लिए, भारत सरकार ने कृषि अपवाह को कम करने के लिए अपशिष्ट जल उपचार में सुधार और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए नीतियों को लागू किया है।

मृदा प्रदूषण तब होता है जब कीटनाशक, रसायन और भारी धातु जैसे हानिकारक पदार्थ मिट्टी में जमा हो जाते हैं, जिससे खाद्य फसलें और जल स्रोत दूषित हो जाते हैं।  मृदा प्रदूषण भी मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन सकता है, जिससे यह कृषि और अन्य उपयोगों के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।  

ध्वनि प्रदूषण मानव गतिविधियों जैसे यातायात, निर्माण और औद्योगिक मशीनरी से अत्यधिक या अवांछित शोर के कारण होता है।  यह सुनवाई हानि, तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है और वन्यजीवों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण दुनिया भर में लगभग 1.6 अरब लोगों को प्रभावित करता है।

ध्वनि प्रदूषण का एक उदाहरण हवाई अड्डों के आसपास का शोर है।  हवाई अड्डों या व्यस्त राजमार्गों के पास रहने वाले निवासी उच्च स्तर के ध्वनि प्रदूषण के संपर्क में आते हैं जो उनके स्वास्थ्य और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।  इस मुद्दे को हल करने के लिए, सरकारें शहरी क्षेत्रों और वन्यजीव आवासों के आसपास शोर के स्तर को नियंत्रित कर सकती हैं, और व्यक्ति इयरप्लग और शोर-रद्द करने वाले हेडफ़ोन का उपयोग कर सकते हैं।

प्रकाश प्रदूषण कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के अत्यधिक उपयोग के कारण होता है, जो प्राकृतिक प्रतिमानों को बाधित कर सकता है और वन्य जीवन और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।  यह ऊर्जा बर्बाद भी कर सकता है और जलवायु परिवर्तन में योगदान दे सकता है।  

प्रकाश प्रदूषण का एक उदाहरण शहरी क्षेत्रों में इमारतों और सड़कों पर अत्यधिक प्रकाश व्यवस्था है।  यह अत्यधिक प्रकाश रात के जानवरों और पक्षियों के प्राकृतिक पैटर्न को बाधित कर सकता है, साथ ही मनुष्यों में नींद संबंधी विकार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। 

पर्यावरण प्रदूषण के संपर्क में आने से मनुष्यों और जानवरों में तनाव, चिंता और अवसाद आता है। यह निराशा और दुख की भावना पैदा करता है। हर साल लाखों और करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रदूषण से खराब हो जाती है और बहुत से लोग मर भी जाते हैं। यह बीमारियों का भी कारण बनता है जिससे पूरी उम्र व्यक्ति को जूझना पड़ता है। पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव बहुत ज्यादा पर फैले हुए हैं और इंसान जानवर और प्रकृति पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। प्रदूषण के कारण सांस की दिक्कत, ह्रदय रोग, कैंसर, जन्म दोष, आदि हो सकते हैं, यह जानवरों को भी नुकसान पहुंचाता है और जैव विविधता हानि का मुख्य कारण है।

समस्या से लड़ने के लिए सरकार को ही नहीं बल्कि हर एक इंसान को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। ऐसे बहुत से लोग होते हैं जिनको इस चीज की भनक नहीं होती कि वह प्रदूषण कर रहे हैं और अपने जीवन को संकट में डाल रहे हैं । ऐसी जगहों पर जाकर लोग जागरूकता फैला सकते हैं और जनजीवन खत्म होने से बचा सकते हैं।

दुनिया भर की कई सरकारों ने ठोस नियम और कानून बनाए हैं जिसके अंतर्गत प्रदूषण फैलाने पर कई साल की जेल हो सकती है और काफी बड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है। ऐसी तकनीकों को विकसित किया जा रहा है जिससे प्रदूषण कम हो सके और फैक्टरियों का कार्य सरल हो सके। सरकार निरन्तर नवीकरणीय ऊर्जा और जैविक खेती जैसी टिकाऊ प्रथाएं, और पर्यावरण की रक्षा के महत्व के बारे में सार्वजनिक जागरूकता फैलाती रहती है।

अंत में पर्यावरण प्रदूषण एक प्रमुख मुद्दा है जो दुनिया के प्राकृतिक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह मानवीय गतिविधियों के कारण होता है और वन्यजीवों, पारिस्थितिक तंत्रों और भावी पीढ़ियों के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए प्रदूषण के स्तर को कम करने, स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए सरकार, व्यवसायों और व्यक्तिओं के सामूहिक प्रयास की ज़रूरत होगी। 

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मुझे उम्मीद है कि आपने paryavaran pradushan hindi mein को पढ़कर बहुत आनन्द लिया होगा।

आज हमने सीखा-

  • Environment pollution essay 

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मैं आपको जल्द से जल्द reply देने की कोशिश करूंगी। 

धन्यवाद.. ।

हमारा essay  पढ़ने के लिए शुक्रिया।

FAQ (Frequently asked Questions)

Paryavaran pradushan kya hai.

पर्यावरण प्रदूषण प्राकृतिक वातावरण में हानिकारक प्रदूषकों का परिचय है जो जीवों और उनके आस- पास जगह पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ये प्रदूषक solid, liquid, gaseous, noise, radiation, के रूप में हो सकता है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं, मनुष्यों और जानवरों में स्वास्थ्य समस्याओं से लेकर ecosystem और जंगलों के विनाश तक। पर्यावरण प्रदूषण के उदाहरणों में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और रेडियोधर्मी संदूषण शामिल हैं।

Paryavaran pradushan ke prakar

पर्यावरण प्रदूषण कई तरह का होता है जैसे- 1. Air- केमिकल गैस, धुएं, धूल, आदि की वजह से प्रदूषण होता है। 2. Water- पानी में केमिकल, बैक्टीरिया, मेटल waste, फैक्ट्री waste, आदि। 3. Soil- मिट्टी में मेटल waste, फैक्ट्री waste, कीटनाशक, acids, आदि। 4. Noise- ट्रैफिक, मशीन, construction, आदि से ध्वनि प्रदूषण। 5. Light- जब रौशनी के कारण जानवरों और इंसानों का sleep cycle और natural pattern खराब होता है। 6. Thermal- फैक्ट्री waste, industrial waste, wildfire, आदि। 7. Radioactive- Nuclear waste, मेडिकल waste, nuclear weapon, आदि।

Paryavaran pradushan ke karan

पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण हैं- इंसानों की गतिविधियां Overpopulation Technology waste ट्रैफिक प्राकृतिक आपदा शहरों का बढ़ना

Paryavaran pradushan

I am a 3rd year student, doing graduation in BA Eco Hons from Patiala. I hope you like my content, don’t forget to share it with your friends.

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paryavaran pradushan essay in hindi 500 words

पर्यावरण पर निबंध | Environment Essay in Hindi

Essay on Environment in Hindi

पर्यावरण, पर  हमारा जीवन पूरी तरह निर्भर है, क्योंकि एक स्वच्छ वातावारण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। पर्यावरण, जीवन जीने के लिए उपयोगी वो सारी चीजें हमें उपहार के रुप में उपलब्ध करवाता है।

पर्यावरण से ही हमें शुद्ध जल, शुद्ध वायु, शुद्ध भोजन,प्राकृतिक वनस्पतियां आदि प्राप्त होती हैं। लेकिन इसके विपरीत आज लोग अपने स्वार्थ और चंद लालच के लिए जंगलों का दोहन कर रहे हैं, पेड़-पौधे की कटाई कर रहे हैं, साथ ही भौतिक सुख की प्राप्ति हुए प्राकृतिक संसाधनों का हनन कर  प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका असर हमारे पर्यावरण पर पड़ा रहा है।

इसलिए पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने एवं प्राकृतिक पर्यावरण के महत्व को समझाने के लिए हर साल दुनिया भर के लोग 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस – World Environment Day के रूप में मनाते हैं। हमने कभी जाना हैं की इस दिवस को हम क्यों मनाते हैं। इस दिन का जश्न मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना है ताकि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम उठा सकें।

और साथ ही कई बार स्कूलों में छात्रों के पर्यावरण विषय पर निबंध ( Essay on Environment) लिखने के लिए कहा जाता है, इसलिए आज हम आपको पर्यावरण पर अलग-अलग शब्द सीमा पर निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं, जिसका चयन आप अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकते हैं –

Environment essay

पर्यावरण पर निबंध – Environment Essay in Hindi

पर्यावरण, जिससे चारों तरफ से  संपूर्ण ब्रहाण्ड और जीव जगत घिरा हुआ है। अर्थात जो हमारे चारों ओर है वही पर्यावरण है। पर्यावरण पर मनुष्य ही नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे, प्राकृतिक वनस्पतियां आदि पूरी तरह निर्भर हैं।

पर्यावरण के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती हैं, क्योंकि पर्यावरण ही पृथ्वी पर एक मात्र जीवन के आस्तित्व का आधार है। पर्यावरण, हमें स्वस्थ जीवन जीने के लिए शुद्ध, जल, शुद्ध वायु, शुद्ध भोजन उपलब्ध करवाता है।

एक शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन जीने के लिए एक स्वच्छ वातावरण बहुत जरूरी है लेकिन हमारे पर्यावरण मनुष्यों की कुछ लापरवाही के कारण दिन में गंदे हो रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे सभी को विशेष रूप से हमारे बच्चों के बारे में पता होना चाहिए।

“ पर्यावरण की रक्षा , दुनियाँ की सुरक्षा! ”

पर्यावरण न सिर्फ जीवन को विकसित और पोषित करने में मद्द करता है, बल्कि इसे नष्ट करने में भी मद्द करता है। पर्यावरण, जलवायु के संतुलन में मद्द करता है और मौसम चक्र को ठीक रखता है।

वहीं अगर सीधे तौर पर कहें मानव और पर्यावरण एक – दूसरे के पूरक हैं और दोनों एक-दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर हैं। वहीं अगर किसी प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित कारणों की वजह से पर्यावरण प्रभावित होता है तो, इसका सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ता है।

पर्यावरण प्रदूषण की वजह से जलवायु और मौसम चक्र में परिवर्तन, मानव जीवन को कई रुप में प्रभावित करता है और तो और यह परिवर्तन मानव जीवन के आस्तित्व पर भी गहरा खतरा पैदा करता है।

लेकिन फिर भी आजकल लोग भौतिक सुखों की प्राप्ति और विकास करने की चाह में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं। चंद लालच के चलते मनुष्य पेड़-पौधे काट रहा है, और प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर कई ऐसी प्रतिक्रियाएं कर रहा है, जिसका बुरा असर हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है।

वहीं अगर समय रहते पर्यावरण को बचाने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो मानव जीवन का आस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए हम सभी को मिलकर उचित कदम उठाने चाहिए। हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिए और पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए।

आधुनकि साधन जैसे वाहन आदि का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत के समय ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं न सिर्फ पर्यावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि मानव जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न कर रहा है। इसके अलावा उद्योगों, कारखानों से निकलने वाले अवसाद और दूषित पदार्थों के निस्तारण की उचित व्यवस्था करनी चाहिए,ताकि प्रदूषण नहीं फैले।

वहीं अगर हम इन छोटी-छोटी बातों पर गौर करेंगे और पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाने में अपना सहयोग करेंगे तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकेगा।

पर्यावरण पर निबंध – Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh

प्रस्तावना

पर्यावरण, एक प्राकृतिक परिवेश है, जिससे हम चारों तरफ से घिरे हुए हैं और जो पृथ्वी पर मौजूद मनुष्य, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी, प्राकृतिक वनस्पतियां को जीवन जीने में मद्द करता है। स्वच्छ पर्यावरण में ही  स्वस्थ व्यक्ति का विकास संभव है, अर्थात पर्यावरण का दैनिक जीवन से सीधा संबंध है।

हमारे शरीर के द्धारा की जाने वाली हर प्रतिक्रिया पर्यावरण से संबंधित है, पर्यावरण की वजह से हम सांस ले पाते हैं और शुद्ध जल -भोजन आदि ग्रहण कर पाते हैं, इसलिए हर किसी को पर्यावरण के  महत्व को समझना चाहिए।

पर्यावरण का अर्थ – Environment Meaning

पर्यावरण शब्द मुख्य रुप से दो शब्दों से मिलकर बना है, परि+आवरण। परि का अर्थ है चारो ओर और आवरण का मतलब है ढका हुआ अर्थात जो हमे चारों ओर से घेरे हुए है। ऐसा वातावरण जिससे हम चारों  तरफ से घिरे हुए हैं, पर्यावरण कहलाता है।

पर्यावरण का महत्व – Importance of Environment

पर्यावरण से ही हम है, हर किसी के जीवन के लिए पर्यावरण का बहुत महत्व है, क्योंकि पृथ्वी पर जीवन, पर्यावरण से ही संभव है। समस्त मनुष्य, जीव-जंतु, प्राकृतिक वनस्पतियां, पेड़-पौड़े, मौसम, जलवायु सब पर्यावरण के अंतर्गत ही निहित हैं। पर्यावरण न सिर्फ जलवायु में संतुलन बनाए रखने का काम करता है और जीवन के लिए आवश्यक  सभी वस्तुएं उपलब्ध करवाता है।

वहीं आज जहां विज्ञान से तकनीकी और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिला है और दुनिया में खूब विकास हुआ है, तो दूसरी तरफ यह बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के लिए भी जिम्मेदार हैं। आधुनिकीकरण, औद्योगीकरण और बढ़ती टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ा रहा है।

मनुष्य अपने स्वार्थ के चलते पेड़-पौधे की कटाई कर रहा है एवं प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ कर रहा है, जिसके चलते पर्यावरण को काफी क्षति पहुंच रही है। यही नहीं कुछ मानव निर्मित कारणों की वजह से वायुमंडल, जलमंडल आदि प्रभावित हो रहे हैं धरती का तापमान बढ़ रहा है और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है, जो कि मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है।

इसलिए पर्यावरण के महत्व को समझते हुए हम सभी को अपने पर्यावरण को बचाने में सहयोग करना चाहिए।

पर्यावरण और  जीवन – Environment And Life

पर्यावरण और मनुष्य एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, अर्थात पर्यावरण पर ही मनुष्य पूरी तरह से निर्भऱ है, पर्यावरण के बिना मनुष्य, अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता है, भले ही आज विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली हो, लेकिन प्रकृति ने जो हमे उपलब्ध करवाया है, उसकी कोई तुलना नहीं है।

इसलिए भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए मनुष्य को प्रकृति का दोहन करने से बचना चाहिए।वायु, जल, अग्नि, आकाश, थल ऐसे पांच तत्व हैं, जिस पर मानव जीवन टिका हुआ है और यह सब हमें पर्यावरण से ही प्राप्त होते हैं।

पर्यावरण न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य का एक मां की तरह ख्याल रखता है,बल्कि हमें मानसिक रुप से सुख-शांति भी उपलब्ध करवाता है।

पर्यावरण, मानव जीवन का अभिन्न अंग है, अर्थात पर्यावरण से ही हम हैं। इसलिए हमें पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।

उपसंहार

पर्यावरण के प्रति हम  सभी को जागरूक होने की जरुरत हैं।  पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई पर सरकार द्धारा सख्त कानून बनाए जाना चाहिए। इसके साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखना हम सभी को अपना कर्तव्य समझना चाहिए, क्योंकि स्वच्छ पर्यावरण में रहकर ही स्वस्थ मनुष्य का निर्माण हो सकता है और उसका विकास हो सकता है।

पर्यावरण पर निबंध – Paryavaran Par Nibandh

पर्यावरण हमें जीवन जीने के लिए सभी आवश्यक चीजें जैसे कि हवा, पानी, रोशनी, भूमि, अग्नि, पेड़-पौधे, प्राकृतिक वनस्पतियां आदि उपलब्ध करवाता है। हम पर्यावरण पर पूरी तरह निर्भर हैं। वहीं अगर हम अपने पर्यावरण को साफ-सुथरा रखेंगे तो हम स्वस्थ और सुखी जीवन का निर्वहन कर सकेंगे। इसिलए पर्यावरण को सरंक्षित करने एवं स्वच्छ रखने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए।

पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, प्रगति और प्रदूषण – 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि विज्ञान की उन्नत तकनीक ने मनुष्य के जीवन को बेहद आसान बना दिया है, वहीं इससे न सिर्फ समय की बचत हुई है बल्कि मनुष्य ने काफी प्रगति भी की है, लेकिन विज्ञान ने कई ऐसी खोज की हैं, जिसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है, और जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।

एक तरफ विज्ञान से प्रोद्यौगिकी का विकास हुआ, तो वहीं दूसरी तरफ उद्योंगों से निकलने वाला धुआं और दूषित पदार्थ कई तरह के प्रदूषण को जन्म दे रहा है और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

उद्योगों से निकलने वाला दूषित पदार्थ सीधे प्राकृतिक जल स्त्रोत आदि में बहाए जा रहे हैं, जिससे जल प्रदूषण की समस्या पैदा हो रही है,इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाले धुंए से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसका मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय – Paryavaran Sanrakshan Ke Upay

  • उद्योगों से निकलने वाला दूषित पदार्थ और धुएं का सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए।
  • पर्यावरण की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगानी चाहिए।
  • वाहनों का इस्तेमाल बेहद जरूरत के समय ही किया जाना चाहिए।
  • दूषित और जहरीले पदार्थों के निपटान के लिए सख्त कानून बनाए जाने चाहिए।
  • लोगों को पर्यावरण के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए।

विश्व पर्यावरण दिवस – World Environment Day

लोगों को पर्यावरण के महत्व को समझाने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से 5 जून से 16 जून के बीच विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। इस मौके पर कई जगहों पर जागरूकता कार्यक्रमों का भी आय़ोजन किया जाता है।

पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं, इसलिए इसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है, अर्थात हम सभी को  मिलकर अपने पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने में अपना सहयोग करना चाहिए।

  • Slogans on pollution
  • Slogan on environment
  • Essay in Hindi

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15 thoughts on “पर्यावरण पर निबंध | Environment Essay in Hindi”

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Nice sir bhote accha post h aapne to moj kar de h sir thank you sir app easi past karte rho ham logo ke liye

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Thank you sir aapne bahut accha post Kiya h mere liye bahut labhkaari h government job ki tayari ke liye

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bahut badhiya jaankari share kiye ho sir, Environment Essay.

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Thanks sir bhaut acha essay hai helpful hai aur needful bhi isme sari jankari di gye hai environment ke baare Mai and isse log inspire bhi hongee isko.pdkee……..

I love this essay…

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Thanks mujhe ye bahut kaam diya speech per

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प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi)

प्रदूषण

वह अवांछित तत्व जो किसी निकाय के संतुलन के प्रतिकूल हो और उसकी खराब दसा के लिए जिम्मेदार हो प्रदूषक तत्व कहलाते हैं तथा उनके द्वारा उत्पन्न विषम परिस्थितियां प्रदूषण कहलाती है। दूसरे शब्दों में “ हमारे द्वारा उत्पन्न वे अपशिष्ट पदार्थ जो पर्यावरण के पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित कर रहे हैं, प्रदूषक तत्व तथा उनके वातावरण में मिलने से उत्पन्न विभिन्न प्रकार के संकट की स्थिति प्रदूषण कहलाती है। ”

प्रदूषण पर 10 वाक्य || प्रदूषण मानवता को कैसे प्रभावित करता है पर निबंध || शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essays on Pollution in Hindi, Pradushan par Nibandh Hindi mein)

प्रदूषण से संबंधित समस्त जानकारियां आपको इस निबंध के माध्यम से मिल जाएगी। तो आईए इस निबंध को पढ़कर पर्यावरण प्रदूषण के बारे में खुद को अवगत कराएं।

प्रदूषण पर निबंध 1 (300 शब्द) – प्रदूषण क्या है

बचपन में हम जब भी गर्मी की छुट्टियों में अपने दादी-नानी के घर जाते थे, तो हर जगह हरियाली ही हरियाली फैली होती थी। हरे-भरे बाग-बगिचों में खेलना बहुत अच्छा लगता था। चिड़ियों की चहचहाहट सुनना बहुत अच्छा लगता था। अब वैसा दृश्य कहीं दिखाई नहीं देता।

आजकल के बच्चों के लिए ऐसे दृश्य केवल किताबों तक ही सीमित रह गये हैं। ज़रा सोचिए ऐसा क्यों हुआ। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य, जल, वायु, आदि सभी जैविक और अजैविक घटक मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। सभी का पर्यावरण में विशेष स्थान है।

प्रदूषण का अर्थ ( Meaning of Pollution )

प्रदूषण, तत्वों या प्रदूषकों के वातावरण में मिश्रण को कहा जाता है। जब यह प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनो में मिल जाते है। तो इसके कारण कई सारे नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है। प्रदूषण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होते है और यह हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभावों के कारण मनुष्यों के लिए छोटी बीमारियों से लेकर अस्तित्व संकट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए पेड़ो की अन्धाधुंध कटाई की है। जिस कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। प्रदूषण भी इस असंतुलन का मुख्य कारण है।

प्रदूषण है क्या ? ( What is Pollution ?)

जब वायु, जल, मृदा आदि में अवांछनीय तत्व घुलकर उसे इस हद तक गंदा कर देते है, कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगे तो उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है। साथ ही यह मानव जीवन के लिए भी खतरे की घंटी है।

मनुष्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसने जितनी नासमझी से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, अब उतनी ही समझदारी से प्रदूषण की समस्या को सुलझाये। वनों की अंधाधुंध कटाई भी प्रदूषण के कारको में शामिल है। अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर इस पर काबू पाया जा सकता है। इसी तरह कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

अगर हमें अपनी आगामी पीढ़ी को एक साफ, सुरक्षित और जीवनदायिनी पर्यावरण देना है, तो इस दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे। और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना सिर्फ हमारे देश ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी के लिए आवश्यक है। ताकि सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवन रह सके।

प्रदूषण पर निबंध 2 (400 शब्द) – प्रदूषण के प्रकार

हमें पहले यह जानना जरुरी है कि हमारी किन-किन गतिविधियों के कारण प्रदूषण दिन प्रति दिन बढ़ रहा है और पर्यावरण में असंतुलन फैला रहा है।

पहले मेरे गांव में ढ़ेर सारे तालाब हुआ करते थे, किन्तु अब एक भी नहीं है। आज हम लोगों ने अपने मैले कपड़ो को धोकर, जानवरों को नहलाकर, घरों का दूषित और अपशिष्ट जल, कूड़ा-कचरा आदि तालाबों में फेंककर इसे गंदा कर दिया है। अब उसका जल कहीं से भी स्नान करने और न ही पीने योग्य रह गया है। इसका अस्तित्व समाप्ति की कगार पर है।

प्रदूषण के प्रकार ( Pradushan ke Prakar )

वातावरण में मुख्यतः चार प्रकार के प्रदूषण हैं –

  • जल प्रदूषण ( Water Pollution )

घरों से निकलने वाला दूषित पानी बहकर नदियों में जाता है। कल-कारखानों के कूड़े-कचरे एवं अपशिष्ट पदार्थ भी नदियों में ही छोड़ा जाता है। कृषि में उपयुक्त उर्वरक और कीट-नाशक से भूमिगत जल प्रदूषित होता है। जल प्रदूषण से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड, हैजा आदि खतरनाक बीमारियाँ होती है।

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)

कारखानों की चिमनी और सड़को पर दौड़ते वाहनों से निकलते धुएँ में कार्बन मोनो ऑक्साइड, ग्रीन हाउस गैसें जैसै कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन आदि खतरनाक गैसें निकलती हैं। ये सभी गैसें वायुमंडल को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। इससे हमारे सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। दमा, खसरा, टी.बी. डिप्थीरिया, इंफ्लूएंजा आदि रोग वायु प्रदूषण का ही कारण हैं।

  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

मनुष्य के सुनने की क्षमता की भी एक सीमा होती है, उससे ऊपर की सारी ध्वनियां उसे बहरा बनाने के लिए काफी हैं। मशीनों की तीव्र आवाज, ऑटोमोबाइल्स से निकलती तेज़ आवाज, हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इनसे होने वाला प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। इससे पागलपन, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, बहरापन आदि समस्याएं होती है।

  • मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

खेती में अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों और कीट-नाशकों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण होता है। साथ ही प्रदूषित मिट्टी में उपजे अन्न खाकर मनुष्यों एवं अन्य जीव-जंतुओं के सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी सतह पर बहने वाले जल में भी यह प्रदूषण फैल जाता है।

प्रदूषण को रोकना बहुत अहम है। पर्यावरणीय प्रदूषण आज की बहुत बड़ी समस्या है, इसे यदि वक़्त पर नहीं रोका गया तो हमारा समूल नाश होने से कोई भी नहीं बचा सकता। पृथ्वी पर उपस्थित कोई भी प्राणी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी  आदि सभी का जीवन हमारे कारण खतरे में पड़ा है। इनके जीवन की रक्षा भी हमें ही करनी है। इनके अस्तित्व से ही हमारा अस्तित्व संभव है।

इन्हे भी पढ़ें: वाहन प्रदूषण पर निबंध || पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध || प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध || वायु प्रदूषण पर निबंध || मृदा प्रदूषण पर निबंध || जल प्रदूषण पर निबंध || ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण पर निबंध 3 (500 शब्द) – प्रदूषण के कारण

2019 में दीवाली के कुछ दिन बाद ही राजधानी दिल्ली में पॉल्यूशन हॉलीडे हुआ। यह अत्यंत चौंकाने वाली बात थी कि, दिल्ली सरकार को पॉल्यूशन के कारण विद्यालय बंद कराना पड़ा। कितने दुःख की बात है। ऐसी नौबत आ गयी है, अपने देश में।

पर्यावरणीय प्रदूषण आज के टाइम की सबसे बड़ी प्राब्लम है। विज्ञान की अधिकता ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, साथ ही प्रदूषण बढ़ाने में भी योगदान दिया है। मनुष्य ने अपने लाभ के लिए प्रकृति से बहुत छेड़छाड़ किया है। प्रकृति का अपना नियम होता है, सभी जीव-जंतु उसी नियम के हिसाब से अपना-अपना जीवन-चक्र चलाते हैं, किंतु हम मनुष्यों ने इससे पर्याप्त छेड़-छाड़ किया है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है।

प्रदूषण के मुख्य कारण (Main Reason for Pollution)

प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  • वनों की कटाई (Deforestation)

बढ़ती जनसंख्या भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं, जिस कारण लगातार वनों को काटा गया है।  पर्यावरण प्रदूषण के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक निर्वनीकरण है। वृक्ष ही वातावरण को शुध्द करते हैं। वनोन्मूलन के कारण ही वातावरण में ग्रीन-हाउस गैसों की अधिकता होते जा रही है। जिसके दुष्परिणाम ग्लोबल-वार्मिग के रूप में प्रकट हो रही है। क्योंकि पेड़ ही पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाइआऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और आक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं।

  • उद्योग-धंधे (Industries)

भोपाल गैस त्रासदी अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कारखाने में कीटनाशक रसायन को बनाने के लिए मिक गैस का उत्पादन होता था। इस गैस संयंत्र के कारखाने में 2-3 दिसंबर 1984 को जहरीली मिक गैस (मिथाइल आइसो सायनाइड) के रिसाव के कारण कुछ ही घंटो में करीबन 2500 लोगों की जान चली गयी थी और हजारों घायल हुए थे। हजारों जानवरो की भी मृत्यु हो गयी थी। इस घटना को भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है।

इस घटना की चर्चा यहाँ इसलिए की, क्योंकि यह औद्योगिकीकरण के कारण हुए प्रदूषण का उदाहरण है। इतना ही नहीं, 6 से 9 अगस्त, 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में किए गए एटॉमिक बम अटैक के कारण हुए भयंकर परिणाम से पूरी दुनिया वाक़िफ है। उसके कारण हुए वायु-प्रदूषण से जापान आज तक उबर नहीं पाया है। अटैक के कारण विनाशकारी गैसें सम्पूर्ण वायु-मंडल में समा गयी थी।

वैज्ञानिकों की माने तो औद्योगिकीकरण के नाम पर बीते 100 सालों में 36 लाख टन कार्बन डाइआऑक्साइड वायुमंडल में छोड़ी गयी है, जिस कारण हमारी पृथ्वी का तापमान बढ़ा है। और तो और मौसम में तब्दीलियां भी इसी कारण हो रही हैं, जैसे अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, अम्लीय वर्षा, बर्फ का पिघलना, समुद्र के जल-स्तर में वृध्दि होना आदि। अकेले अमेरिका विश्व का लगभग 21% कार्बन वायुमंडल में उत्सर्जित करता है।

बढ़ता प्रदूषण आज समूल विश्व का सरदर्द बन चुका है। प्रदूषण के कारण चीजें दिन प्रति दिन बद से बदतर होती जा रही है। चूँकि पूरा विश्व इसके प्रति गंभीर है। लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए हर साल पर्यावरण दिवस, जल दिवस, ओजोन दिवस, पृथ्वी दिवस, जैव विविधता दिवस आदि मनाये जाते है। समय-समय पर पर्यावरण के संरक्षण के लिए स्कॉटहोम सम्मेलन, मॉट्रियल समझौता आदि होता रहा है।

Pollution Essay in Hindi

प्रदूषण पर निबंध 4 (600 शब्द) – प्रदूषण के प्रकार व रोकथाम

आज के समय में प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन चुका है। इसने हमारे पृथ्वी को पूर्ण रुप से बदल कर रख दिया है और दिन-प्रतिदिन पर्यावरण को क्षति पहुंचाते जा रहे है, जोकी हमारे जीवन को और भी ज्यादे मुश्किल बनाते जा रहा है। कई तरह के जीव और प्रजातियां प्रदूषण के इन्हीं हानिकारक प्रभवों के कारण धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहीं है।

प्रदूषण के प्रकार (Types Of Pollution)

1. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है। दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।

2. जल प्रदूषण (Water Pollution)

उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है।

3. भूमि प्रदूषण (Soil Pollution)

वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।

4. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।

5. प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)

प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

6. रेडियोएक्टिव प्रदूषण (Radioactive Pollution)

रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है।

7. थर्मल प्रदूषण (Thermal Pollution)

कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

8. दृश्य प्रदूषण (Visual Pollution)

मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि।

विश्व के सर्वाधिक प्रदूषण वाले शहर (Most Polluted City of The World)

एक तरफ जहां विश्व के कई शहरों ने प्रदूषण के स्तर को कम करने में सफलता प्राप्त कर ली है, वही कुछ शहरों में यह स्तर काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व के सबसे अधिक प्रदूषण वाले शहरों की सूची में कानपुर, दिल्ली, वाराणसी, पटना, पेशावर, कराची, सिजीज़हुआन्ग, हेजे, चेर्नोबिल, बेमेन्डा, बीजिंग और मास्को जैसे शहर शामिल है। इन शहरों में वायु की गुणवत्ता का स्तर काफी खराब है और इसके साथ ही इन शहरों में जल और भूमि प्रदूषण की समस्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे इन शहरों में जीवन स्तर काफी दयनीय हो गया है। यह वह समय है जब लोगों को शहरों का विकास करने के साथ ही प्रदूषण स्तर को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

प्रदूषण कम करने के उपाय (Tips for Preventing Pollution)

जब अब हम प्रदूषण के कारण और प्रभाव तथा प्रकारों को जान चुके हैं, तब अब हमें इसे रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। इन दिये गये कुछ उपायों का पालन करके हम प्रदूषण की समस्या पर काबू कर सकते है।

1. कार पूलिंग

2. पटाखों को ना कहिये

3. रीसायकल/पुनरुयोग

4. अपने आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखकर

5. कीटनाशको और उर्वरकों का सीमित उपयोग करके

6. पेड़ लगाकर

7. काम्पोस्ट का उपयोग किजिए

8. प्रकाश का अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग ना करके

9. रेडियोएक्टिव पदार्थों के उपयोग को लेकर कठोर नियम बनाकर

10. कड़े औद्योगिक नियम-कानून बनाकर

11. योजनापूर्ण निर्माण करके

प्रदूषण दिन-प्रतिदिन हमारे पर्यावरण को नष्ट करते जा रहा है। इसे रोकने के लिए हमें जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हमारी इस पृथ्वी की खूबसूरती बरकरार रह सके। यदि अब भी हम इस समस्या का समाधान करने बजाए इसे अनदेखा करते रहेंगे, तो भविष्य में हमें इसके घातक परिणाम भुगतने होंगे।

FAQs: Frequently Asked Questions

उत्तर – भारत का सबसे अधिक प्रदूषित राज्य राजधानी नई दिल्ली है।

उत्तर – भारत में सबसे कम प्रदूषित शहर मिजोरम का लुंगलेई शहर है।

उत्तर – विश्व का सबसे कम प्रदूषित देश डेनमार्क है।

उत्तर –जल प्रदूषण की मात्रा BOD (Biological Oxygen Demand) से मापी जाती है। 

उत्तर –भारत में प्रदूषण नियंत्रण “केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड” के अंतर्गत आता है।

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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Paryavaran aur Pradushan”, “पर्यावरण और प्रदूषण” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

पर्यावरण और प्रदूषण

Paryavaran aur Pradushan

विश्व की जटिलतम समस्याओं में से एक है पर्यावरण और प्रदूषण। मनुष्य अपने स्वार्थपूर्ति के लिए नित्य नए उपक्रमों की स्थापना करता जा रहा है जो उसे संपन्न तो बना ही रही है पर अंदर ही अंदर खोखली भी करती जा रही है। वह समय ज्यादा दूर नहीं जब इस धरती से मानव जाति का विनाश हो जाएगा।

प्रदूषण क्या होता है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जानने के लिए हमें हमारे किए गए कार्यों की समीक्षा करनी पड़ेगी।

जल, वायु और भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाला कोई भी बदलाव प्रदूषण को जन्म देता है। एक ओर जहाँ हमारी दुनियाँ तेजी से विकास की ओर अग्रसर है वहीं दूसरी ओर वह उसी तेजी से प्रदूषण से पीड़ित होती जा रही है। जिस कारण आज एक आम इंसान का जीना दूभर हो गया है।

प्रदूषण की वजह से आसमान जहरीले धुएँ से भरता जा रहा है। नदियों का पानी गंदा होता जा रहा है। साराका सारावातावरण ही दूषित होता जा रहा है। निरो हम अंग्रेजी में पॉल्यूशन के नाम से जानते हैं।

प्रदूषण भी कई प्रकार के होते हैं। मोटे तौर पर हम यह कह सकते हैं कि जिस किसी में भी कोई बदलाव हो जैसे कि आवश्यकता से कम या अधिक वह अंत में | प्रदूषण के रूप में उभरता है।

मुख्यतः तीन प्रकार के प्रदूषण देखने को मिलते हैं,

वे हैं- वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण।

जिस गति से मानव मशीनों का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के जीवन में ला रहा है। वह तो खुद मशीभी बनता ही जा रहा है साथ ही अपने आसपास के वातावरण को भी दूषित करता जा रहा है।

मानव अपने समय और गौरव को बढ़ाने हेतु अपने आवागमन के लिए वाहनों का जो इस्तेमाल करता है उसके कारण जो हवा या गैस उसके वाहन से जल कर बाहर निकलती है वह अपने आसपास के स्वच्छ शीतल हवा को भी दूषित कर डालती है। जिस कारण हमें आजकर नीले आकाश के बदले काला आकाश ही नजर आने लगा है।

मानव अपने आराम के लिए जो ए.सी., जेनरेटर, वाहन आदि का इस्तेमाल कर रहा है, उससे उसे फायदे तो बहुत हैं पर नुकसान की भी कोई सीमा नहीं है। आज के मानव को तो स्वच्छ वायु क्या होती है शायद यह भी पता नहीं है।

जिस गति से मानव अपने आवास, निवास के लिए वनों की कटाई करता जा रहा है वह दिन दूर नहीं शायद जब हमें वृक्षों के दर्शन भी होना दूर्लभ हो जाए। साथ ही वह यह नहीं जानता कि उसके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले ऑक्सीजन को भी वह वनों के साथ ने खत्म करता जा रहा है।

वायु तो वायु, जल भी प्रदूषित होने से नहीं बचा है। पहले के भारत वर्ष को नदियों का या जलका देश भी कहते थे जहाँ गंगा, कावेरी, नर्मदा, रावी आदि नदियाँ निरंतर बहती रहती हैं, पर वह भी आज के मनुष्य द्वारा दूषित होने से नहीं बची। जो अवशेष फैक्टरी में बचते हैं वह नदियों में बहा दिए जाते हैं। जिस कारण नदी का जल विषैला होता जा रहा है।

अब अगर हम ध्वनि की बात करें तो उससे मानव जाति ने फायदा भी उठाया साथ ही उसे भी चूषित करने से पीछे नहीं हटा। आज के युवा पीढ़ी को अगर हम देखें तो वह अपने कार के स्टीरियो, घर के स्टीरियो, रेडियो, एफ.एम., आदि इतने उंचे स्वर में सुनते हैं कि वह खुद तो ऊंचा सुनने के आदि होते ही हैं, साथ के वातावरण को भी दूषित कर देते हैं। वह शायद यह नहीं जानते कि ध्वनि प्रदूषित होने से उनमें तनाव व उत्तेजना को बढ़ती ही है साथ ही बढ़ता है उनका बहरापन।

आज के समय मानव के लिए सारा परिवेश ही विषपंत हो गया व गलत नहीं होगा। आज सारी की सारी मानव जाति ही संकट में है।

हर एक सच्चे नागरिक का कर्तव्य है कि वह इस समस्या का उचित समाधान ढूंढ निकाले। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो प्रदूषण युक्त इस धरती के वातावरण में मानव जाति का अस्तित्व ही संकट में आ जाएगा। आज मनुष्य अपनी सारी सुखसुविधाएँ प्राकृतिक सम्पदा का दोहन करते हुए भी पाने के लिए उतारु है। जिसके कारणवश प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हुई है | वह और कुछ न करे तो कम से कम इतने वृक्षों का वृक्षारोपण ही कर दे कि सारा वातावरण हरा भरा हो सके और हम कह सकें कि यह है हमारी प्रदूषण मुक्त धरती।

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प्रदूषण पर अनुच्छेद, लेख

paryavaran pradushan essay in hindi 500 words

By विकास सिंह

pollution paragraph in hindi

प्रदूषण पर्यावरण में हानिकारक या विषाक्त पदार्थों की उपस्थिति या परिचय को संदर्भित करता है। इस मामले में पर्यावरण सभी प्राकृतिक जीवित और गैर-जीवित चीजों को संदर्भित करता है जो हमें घेरते हैं। वन, जल निकाय, वायु, महासागर सभी हमारे प्राकृतिक वातावरण का निर्माण करते हैं और, उनकी शुद्धता और दीर्घायु से समझौता करने वाले किसी भी दूषित पदार्थ को “प्रदूषण” कहा जाता है।

हाल के 2018 ईपीआई (पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक) के आंकड़ों के अनुसार, भारत वायु गुणवत्ता और समग्र पर्यावरणीय स्वास्थ्य के मामले में 180 देशों में से 177 रैंक पर है; 2016 में यह 141 वीं रैंक से अब इस ओहदे पर आ गया है।

विषय-सूचि

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (100 शब्द)

पर्यावरण प्रदूषण हमारे पर्यावरण में हानिकारक और जहरीले पदार्थों की उपस्थिति को संदर्भित करता है। यह न केवल वायु प्रदूषण तक सीमित है, बल्कि जल निकायों, मिट्टी, जंगलों, जलीय जीवन और सभी भूमि जीवित प्रजातियों को भी प्रभावित कर सकता है। पर्यावरण प्रदूषण के लिए मुख्य कारक मानव उत्पन्न हैं।

बहत समय से हम अपने निवास स्थान का विस्तार करने और जीवन को आसान बनाने के लिए पर्यावरण के साथ हस्तक्षेप कर रहे हैं। मनुष्यों ने ऑटोमोबाइल का आविष्कार किया है, कारखानों की स्थापना की है, सड़कों और शहरों के लिए रास्ता बनाने के लिए जंगलों को काट दिया है – सभी पर्यावरणीय स्वास्थ्य से समझौता करते हैं। अपर्याप्त अपशिष्ट निपटान और इसके कूड़ेदान के परिणामस्वरूप हमारे महासागरों और जल निकायों को प्रदूषित किया गया है, जिससे वे बेकार हो गए हैं और उन प्रजातियों के जीवन को खतरा है जो उन पर निर्भर हैं।

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (150 शब्द)

प्रदूषण का पर्यावरण पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी गिरावट और जीवित प्रजातियों की कमी भी होती है। इसमें एसिड रेनफ़ॉर्म, ग्लोबल वार्मिंग , अकाल, ड्राफ्ट और चरम जलवायु परिस्थितियों जैसे अन्य परिणामों के साथ गंभीर परिणाम हैं। प्रदूषण का सबसे आम प्रकार वायु प्रदूषण है।

महानगर या शहरों में आज हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वह जहरीले CO (कार्बन मोनोऑक्साइड, CO2 (कार्बन डाय- ऑक्साइड), N2O (नाइट्रस ऑक्साइड) और CH4 (मीथेन) से भरी होती है। इन गैसों के साँस लेने से केवल मनुष्यों में श्वसन संबंधी बीमारियाँ होती हैं। Co2 भी एक शक्तिशाली ग्रीन हाउस गैस है जो बढ़ते ग्रीन हाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग के लिए एक कारक है।

परिवहन उद्योग 25% वैश्विक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन का कारण बनता है; बाद में, ग्रीन हाउस प्रभाव और पृथ्वी की औसत सतह का तापमान बढ़ जाता है। पृथ्वी की औसत सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्तमान शताब्दी के अंत तक यह लगभग 1.8 डिग्री से बढ़ जाएगा। यहां तक ​​कि महासागरों का तापमान भी बढ़ रहा है, हालांकि समुद्र की बड़ी ऊष्मा को अवशोषित करने की क्षमता के कारण धीमी दर पर यह बढ़ रहा है।

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (200 शब्द)

हालाँकि आज वायु प्रदूषण सबसे आम प्रकार का प्रदूषण है, लेकिन यह एकमात्र प्रदुषण नहीं है। वायु प्रदूषण के अलावा, कई मानव प्रेरित गतिविधियाँ हैं जो जल निकायों और मिट्टी जैसे प्रदूषण या प्राकृतिक संसाधन को खराब करती हैं। अनजाने औद्योगीकरण ने वायु और जल प्रदूषण को बढ़ावा दिया है, जिससे पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उद्योगों को संचालित करने के लिए अच्छी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है और इसलिए मुख्य रूप से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली धारा, नदी या जल निकाय के निकटता में स्थापित होते हैं।

इसके अलावा, औद्योगिक अपशिष्ट जिसमें एस्बेस्टस आदि जैसे जहरीले रसायन शामिल हैं, ताजे पानी का उपयोग करके हमारे जल निकायों में ले जाते है। यह न केवल हमारे प्राकृतिक जल संसाधनों को प्रदूषित करता है बल्कि प्रजातियों, पौधों और शैवाल की गिरावट में भी जिम्मेदार है।

जल संसाधनों और मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य के लिए एक और सबसे आम कारक है – कूड़ा। विभिन्न स्थानों पर कूड़े के निस्तारण और अज्ञानता के अपर्याप्त तंत्र के परिणामस्वरूप ऐसा होता है। कूड़े के माध्यम से प्रदूषक का सबसे आम प्रकार प्लास्टिक है। विभिन्न आयामों के पतले प्लास्टिक बैग, जब ठीक से निपटाए नहीं जाते यह या तो जल निकायों में जाते हैं या मिटटी में समाहित हो जाते हैं।

गैर-जैव होने के नाते वे सदियों तक वहां रहते हैं, उन्हें प्रदूषित करते हैं और जीवन को खतरे में डालते हैं। कछुओं और मछलियों की कई प्रजातियाँ अक्सर इस प्लास्टिक को खाना समझकरखा जाती है और यह उनकी बढती मौत का कारण बन रहा है।

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (250 शब्द)

प्रदूषण हमारे पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है और वैश्विक चिंता का विषय है। यह हवा, जल निकायों, जंगलों, वनस्पतियों, मिट्टी, महासागरों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित करता है, जिनके लंबे समय तक चलने और घातक परिणाम होते हैं। हर प्रमुख प्रदूषक जो पर्यावरण को खतरे में डालता है, मानवीय गतिविधियों द्वारा निर्मित होता है। अपनी सीमाओं की प्रगति और विस्तार की इच्छा में, मनुष्यों ने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है।

प्राकृतिक संसाधनों का न केवल निरंतर उपयोग किया गया है, बल्कि प्रदूषित भी किया गया है। हम इस तथ्य को महसूस नहीं करते हैं कि आज हम जिन प्राकृतिक संसाधनों को प्रदूषित करते हैं, उनके उत्पादन में लाखों वर्ष लगे हैं।

आज मानव प्रेरित प्रदूषण इतना विशाल हो गया है कि दुनिया का कोई भी कोना इसके प्रभावों से अलग नहीं है। फैक्ट्रियों और ऑटोमोबाइल से निकलने वाले जहरीले धुएं को लोग सांस की बीमारियों से पीड़ित बता रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप दुनिया भर के स्थानों में अत्यधिक गर्म और ठंडी जलवायु की स्थिति देखी जा रही है। प्राकृतिक जल संसाधनों की कमी के साथ अकाल और सूखा आम हो गया है।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप गैलेक्टिक और ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्र का स्तर बढ़ गया है और बाढ़ आ गई है। साथ ही, समुद्री तापमान और प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने से समुद्री प्रजातियों का क्षय होता है जैसे – प्लैंकटन, कोरल फिश, सील, ग्रेट बैरियर रीफ आदि।

वनों की कटाई से वायु प्रदूषण स्तर में भी वृद्धि होती है क्योंकि वन प्राकृतिक फिल्टर के रूप में काम करते हैं – हानिकारक गैसों को अवशोषित करके और ऑक्सीजन उत्सर्जित करके हवा को साफ करते हैं। वे प्राकृतिक वायु फिल्टर के रूप में कार्य करते हैं, उनके बिना पृथ्वी धुएं की एक बड़ी गेंद के अलावा और कुछ नहीं होगी। जब तक हम नुकसान की गंभीरता का एहसास नहीं करते हैं जो हमने किया है और युद्धस्तर पर उपायों को रोकते हैं; हमारी आने वाली पीढ़ियां खराब स्वास्थ्य और निराशा में रहेंगी।

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (300 शब्द)

प्रदूषण शब्द का तात्पर्य पर्यावरण में हानिकारक पदार्थ के प्रवेश से है और हानिकारक पदार्थ को प्रदूषक कहा जाता है। प्रदूषण के विभिन्न कारण हैं और उनमें से लगभग सभी मानव प्रेरित हैं।

प्रदूषण के कारण और प्रभाव:

ऐसी कई मानवीय गतिविधियाँ हैं जो प्रदूषण का कारण बनती हैं। पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनने वाली अधिकांश गतिविधियाँ जीवाश्म ईंधन की खपत, औद्योगिकीकरण और कूड़े-करकट हैं। वैश्विक अनुमानों के अनुसार, जीवाश्म ईंधन की दुनिया की 80% वार्षिक ऊर्जा है। इसके अलावा, जीवाश्म ईंधन के जलने से हर साल CO2 का 21.3 बिलियन टन उत्पादन होता है, जो एक शक्तिशाली ग्रीन हाउस गैस है। पर्यावरण में CO2 की बड़ी मात्रा की उपस्थिति से ग्रीन हाउस प्रभाव में वृद्धि होती है और इसलिए ग्लोबल वार्मिंग होती है।

उद्योग आमतौर पर एक जल निकाय की निकटता में स्थापित होते हैं और ताजे पानी का उपयोग औद्योगिक अपशिष्टों को जल निकायों में धोने के लिए करते हैं। औद्योगिक कचरे में कई हानिकारक पदार्थ जैसे बजरी, रेत, जहरीले रसायन और धातु आदि शामिल हो सकते हैं; जो उन्हें प्रदूषित करने वाले जल निकायों में धोया जाता है। अक्सर शहरों के सीवेज को नदियों और नालों में बहा दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उनका प्रदूषण बढ़ जाता है और समुद्री जीवन समाप्त हो जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण और पारिस्थितिक असंतुलन की एक बड़ी मात्रा के लिए लिटरिंग भी जिम्मेदार है। अपर्याप्त अपशिष्ट संग्रह और निपटान से शहरों और उसके आसपास प्लास्टिक और जहरीले कचरे के बड़े ढेर हो गए हैं। यह नॉन बायो डिग्रेडेबल कचरा हमारे जल निकायों में जाता है, जिससे उनमे प्रदूषण होता है और समुद्री जीवन को खतरा होता है।

समाधान के तरीके:

सख्त पर्यावरण नीतियां और बड़ी जन-जागरूकता आगे पर्यावरणीय क्षति को रोकने की कुंजी है। उद्योगों को अपने कार्बन पदचिह्न को कम करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए बाध्य करना अनिवार्य है। इसके अलावा, किसी भी उल्लंघन को कड़ाई से जुर्माना लगाने और बंद करने से निपटा जाना चाहिए। हानिकारक अपशिष्ट को हमारे जल निकायों और मिट्टी तक पहुंचने से रोकने के लिए कुशल अपशिष्ट संग्रह और निपटान तंत्र की भी आवश्यकता होती है।

प्रदूषण पर अनुच्छेद, paragraph on pollution in hindi (350 शब्द)

आज प्रदूषण एक वैश्विक खतरा बन गया है और पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए खतरा है।

प्रदूषण और कारणों के प्रकार:

नीचे हम विभिन्न प्रकार के प्रदूषण और इसके कारणों से गुजरेंगे। प्रदूषण को मोटे तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

वायु प्रदुषण

वायु प्रदूषण पर्यावरण में मौजूद हानिकारक और जहरीली गैसों की उपस्थिति को संदर्भित करता है। कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड आदि जहरीली गैसों से निकलने वाले जीवाश्म ईंधन की खपत वायु प्रदूषण में योगदान करने वाला प्रमुख कारक है।

ध्वनि प्रदूषण

शोर प्रदूषण जिसे ध्वनि प्रदूषण भी कहा जाता है, पर्यावरण में अवांछित ध्वनि की उपस्थिति को संदर्भित करता है जो मनुष्यों और जानवरों की गतिविधियों पर हानिकारक प्रभाव डालता है। ध्वनि प्रदूषण के कुछ प्रमुख योगदान परिवहन वाहन, निर्माण कार्य, लाउड म्यूजिक आदि हैं।

मिट्टी प्रदूषण

मृदा प्रदूषण मानव निर्मित रसायनों और प्रदूषकों को मिट्टी में मिलाने, इसे विषाक्त बनाने और उपज को कम करने के कारण होता है। मृदा प्रदूषण के मुख्य कारणों में कृषि उद्योग द्वारा कीटनाशकों का उपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट निपटान, कूड़े और अनुचित अपशिष्ट निपटान शामिल हैं।

प्रकाश प्रदूषण

प्रकाश प्रदूषण को फोटो प्रदूषण भी कहा जाता है और यह रात में पर्यावरण में मानव निर्मित प्रकाश की उपस्थिति को संदर्भित करता है। प्रकाश प्रदूषण का मुख्य कारण अत्यधिक और गैर जरूरी प्रकाश व्यवस्था है। प्रकाश प्रदूषण पर्यावरण को बाधित करता है और इसकी सुंदरता को कम करता है। कुछ पक्षी प्रजातियों को अत्यधिक प्रकाश व्यवस्था से भ्रमित होने के लिए जाना जाता है।

ऊष्मीय प्रदूषण

थर्मल प्रदूषण परिवेश पानी के तापमान में अचानक परिवर्तन को संदर्भित करता है। थर्मल प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है बिजली संयंत्रों और उद्योगों द्वारा शीतलक के रूप में पानी का उपयोग। शीतलक के रूप में उपयोग किया जाने वाला पानी गर्म हो जाता है और जब इसे प्राकृतिक वातावरण में लौटाया जाता है, तो इसका परिणाम अचानक तापमान में परिवर्तन, ऑक्सीजन सामग्री में कमी और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है।

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण का तात्पर्य मानव गतिविधियों द्वारा जल निकायों के दूषित होने से है। जल प्रदूषण का प्रमुख कारण औद्योगिक अपशिष्ट निपटान, सीवेज निपटान और कूड़े से हैं। हानिकारक और जहरीले रसायनों वाले औद्योगिक कचरे को जल निकायों में डाला जाता है, जिससे उनका प्रदूषण होता है। इसके अलावा, जल निकायों में और उसके आसपास कूड़े डालने से उनका प्रदूषण होता है और पानी उपयोग के लिए खतरनाक हो जाता है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण

रेडियोधर्मी प्रदूषण से तात्पर्य पर्यावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों की उपस्थिति से है। ऐसे रेडियोधर्मी पदार्थ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरनाक प्रभाव डालते हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण की ओर ले जाने वाले कारक अक्षम परमाणु अपशिष्ट हैंडलिंग, परमाणु विस्फोट और परमाणु दुर्घटनाएं हैं।

प्रदूषण पर लेख, article on pollution in hindi (400 शब्द)

प्रदूषण से तात्पर्य पर्यावरण में विषाक्त पदार्थों के प्रवेश से है। अधिकांश प्रदूषक मानव गतिविधियों द्वारा निर्मित होते हैं; हालांकि, पर्यावरणीय प्रदूषण के लिए कुछ प्राकृतिक कारण भी जिम्मेदार हैं।

प्रदूषण के प्राकृतिक कारण:

प्राकृतिक वायु और जल प्रदूषण प्राकृतिक घटनाओं के कारण होता है, या तो अस्थायी या निरंतर होता है। मानव द्वारा उत्पन्न कारणों की तुलना में प्राकृतिक कारणों से लाया गया प्रदूषण नगण्य है। वायु प्रदूषण के कुछ प्राकृतिक कारण ज्वालामुखी विस्फोट और कोहरे हैं। कुछ अलग-थलग क्षेत्रों में कुछ जहरीली गैसों का रिसाव हो सकता है जैसे रेडॉन या CO2 आदि वायु प्रदूषण के कारण होते हैं।

प्राकृतिक जल प्रदूषण मुख्य रूप से सतह के खिसकने के कारण होता है, जिसमें अघुलनशील और अशुद्ध पदार्थ होते हैं और निकटता में मिट्टी से प्राकृतिक रूप से विषाक्त पदार्थ होते हैं।

मानव जीवों पर प्रदूषण के प्रभाव:

प्रदूषण न केवल मनुष्यों, बल्कि पौधों, पक्षियों, जानवरों और समुद्री प्रजातियों के स्वास्थ्य से संबंधित एक गंभीर खतरा है। अध्ययन से पता चलता है कि प्रदूषण व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा को काफी कम कर देता है। अकेले भारत में, अनुमानित 7 लाख लोग हर साल विभिन्न प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण मर जाते हैं।

अगर प्रदूषण अनियंत्रित हो जाए तो क्या होगा:

यदि आज की तरह ही प्रदूषण जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं, जब आकाश ऑक्सीजन की कमी के कारण धुँधला हो जाएगा और साँस लेना मुश्किल हो जाएगा। लगातार जल प्रदूषण से जल की कमी, अकाल, सूखा और पारिस्थितिक असंतुलन पैदा होगा।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के सर्वोत्तम तरीके:

प्रदूषण को नियंत्रित करने के कुछ सर्वोत्तम तरीके हैं – पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प, कुशल अपशिष्ट संग्रह और निपटान, प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग न करना, नियंत्रित मानव आबादी, वन रोपण और उद्योगों की स्थापना को नियंत्रित करने वाली वैश्विक नीति और उनके कार्बन फुट प्रिंट को विनियमित करना। इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है – प्रदूषण के मुद्दे पर आम जनता की जागरूकता को बढ़ाना।

लोगों को इस तथ्य को स्वीकार करना चाहिए कि, प्रदूषण और ग्रह और उसके पूरे जीवित प्रजातियों के जीवन को बचाने के लिए एक समाधान खोजना, अंततः मनुष्य ही कर सकता है। साथ ही, इस पर एक साथ काम नहीं करना एक गलती होगी। एक स्थान पर प्रदूषण से कुछ दूर के स्थान पर जीवन को खतरा होता है; इसलिए, विश्व स्तर पर प्रदूषण को एक साथ मिलकर निपटाया जाना चाहिए।

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विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi : पढ़िए पर्यावरण और हम पर निबंध

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  • Updated on  
  • मई 25, 2024

Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi

पर्यावरण शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। परि + आवरण। इसका अर्थ है हमारे आसपास मौजूद सबकुछ जैसे वायु, जल, धरती, जीव जंतु और वनस्पतियां। पर्यावरण जीवन का आधार है और यह सेहत के लिए भी बहुत ज़रूरी है। पर्यावरण को साफ़ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। हम पेड़ लगाकर और अपने आसपास को साफ रखकर पर्यावरण को दूषित होने से बचा सकते हैं। यहाँ Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi दिया गया है। इसकी मदद से छात्र पर्यावरण पर हिंदी में निबंध लिख सकते हैं। 

This Blog Includes:

पर्यावरण और हम पर 100 शब्दों में निबंध , पर्यावरण और हम पर 200 शब्दों में निबंध , पर्यावरण हमारी जीवन समर्थन प्रणाली , पर्यावरणीय क्षरण से होने वाले परिणाम, पर्यावरण और हम पर 10 लाइन्स.

पर्यावरण का मानव कल्याण से गहरा संबंध है। यह हमें जीवित रहने के लिए आवश्यक हवा, पानी, भोजन और आश्रय प्रदान करता है। वनों की कटाई, प्रदूषण और अत्यधिक उपभोग जैसी मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण को ख़राब कर रही हैं। के कारण जैव विविधता के लिए ख़तरा है, पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करता है और जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है। परिणामस्वरूप, मनुष्यों को स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आजीविका के लिए जोखिम का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्थायी समाधानों को किया जाना चाहिए। संरक्षण के प्रयास, नवीकरणीय ऊर्जा को उपयोग में लेना और अपशिष्ट को कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए।

इसके अलावा पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरणीय प्रबंधन को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण है। एक स्थायी और सामंजस्यपूर्ण संबंध को बढ़ावा देने के लिए मनुष्यों और पर्यावरण के बीच के संबंध को पहचानना आवश्यक है।

पर्यावरण हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यावरण हमें आवश्यक संसाधन प्रदान करता है और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने वाले पारिस्थितिक तंत्र को भी बनाए रखता है। हमारे कार्यों का पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे जलवायु परिवर्तन होता है। प्रदूषण, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपभोग पर्यावरणीय के क्षरण के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से हैं।

यह गिरावट मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण खतरा पैदा करती है। उदाहरण के लिए, वायु और जल प्रदूषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ और जलजनित बीमारियाँ हो सकती हैं। इन बीमारियों से दुनिया भर में लाखों लोग प्रभावित होंगे। जलवायु परिवर्तन मौसमी घटनाओं को बढ़ाता है, खाद्य उत्पादन को खतरे में डालता है और समुदायों को भी विस्थापित करता है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए, टिकाऊ प्रयास करना आवश्यक है जो हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करें।  इसमें उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में परिवर्तन जैसे कार्य शामिल है। पर्यावरण प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

मानव और पर्यावरण के बीच अंतर्संबंध को पहचानकर, हम एक स्थायी भविष्य की दिशा में काम कर सकते हैं। हमें संरक्षण प्रयासों को प्राथमिकता देना होगा। वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की सुरक्षा करने वाली नीतियों को लागू करना आवश्यक है। केवल सामूहिक मेलजोल और जिम्मेदार नेतृत्व के माध्यम से ही हम सभी के लिए एक स्वस्थ ग्रह बना हैं।

पर्यावरण और हम पर 500 शब्दों में निबंध 

Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi 500 शब्दों में निबंध नीचे दिया गया है:

पर्यावरण मानव को पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक संसाधन और जीविका प्रदान करता है। पर्यावरण के साथ हमारा रिश्ता केवल लेन-देन का नहीं है, बल्कि गहराई से एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इसका हमारी भलाई और ग्रह के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। क्योंकि पर्यावरण का संरक्षण अत्यधिक आवश्यक है इसलिए यह निबंध पर्यावरण और मानव के बीच संबंध पर प्रकाश डालता है। 

पर्यावरण में ऑक्सीजन शामिल है जिसमें हम सांस लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, वह भूमि जिसमें हम रहते हैं, और वह जैव विविधता जो हमारे चारों ओर है। ये तत्व सामूहिक रूप से हमारी जीवन समर्थन प्रणाली बनाते हैं, पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखते हैं और मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करते हैं। हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन से लेकर जिन दवाइयों पर हम निर्भर हैं, पर्यावरण पर हमारी निर्भरता निर्विवाद है। दुर्भाग्य से बीते कुछ दशकों की मानव की गतिविधियों ने पर्यावरण पर भारी असर डाला है, जिससे व्यापक गिरावट और पारिस्थितिक असंतुलन पैदा हुआ है।  वनों की कटाई, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपभोग और जलवायु परिवर्तन ग्रह के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करने वाली प्रमुख चुनौतियों में से हैं। ये गतिविधियाँ न केवल पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता को खतरे में डालती हैं, बल्कि पर्यावरणीय आपदाओं को भी बढ़ाती हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करती हैं।

पर्यावरणीय क्षरण के परिणाम दूरगामी होते हैं। जैव विविधता के नुकसान से पारिस्थितिक तंत्र का लचीलापन कम हो जाता है। इससे पर्यावरण प्राकृतिक आपदाओं जैसी गड़बड़ी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। वायु, जल और मिट्टी का प्रदूषण महत्वपूर्ण संसाधनों को दूषित करता है, जिससे मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता खतरे में पड़ती है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन मौसमी घटनाओं को बढ़ाता है, खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालता है, और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को बढ़ाता है, विशेष रूप से यह कमजोर समुदायों को प्रभावित करता है। इस कारण से पर्यावरण संरक्षण एक वैश्विक मुद्दा बन गया है। पृथ्वी पर जीवन की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन को कम करना और पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा करना सबसे अधिक आवश्यक है। संरक्षण के प्रयासों में कई कार्य किए जा सकते हैं, जिनमें आवास संरक्षण, पुनर्वनीकरण, संसाधन प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना शामिल है।

Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi पर 10 लाइन्स नीचे दी गई है:

  • पर्यावरण हवा, पानी और भोजन जैसे आवश्यक संसाधन प्रदान करके जीवन को बनाए रखता है।
  • प्रदूषण और वनों की कटाई सहित मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं।
  • पर्यावरणीय क्षरण मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र के लिए जोखिम पैदा करता है।
  • जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं को बढ़ा देता है, जिससे दुनिया भर के समुदायों पर असर पड़ता है।
  • हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए संरक्षण प्रयास, जैसे आवास संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना महत्वपूर्ण हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
  • पर्यावरण और मानव कल्याण आपस में जुड़े हुए हैं, जो प्रकृति के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।
  • हमारे आज के कार्य पर्यावरण के भविष्य को आकार देंगे और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेंगे।
  • पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने और एक स्थायी भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग और सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।

पर्यावरण और मानवता के बीच का संबंध हमारे स्वास्थ्य, समृद्धि और अस्तित्व के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। वर्तमान के समय में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना अत्यधिक आवश्यक है। वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की भलाई सुनिश्चित करने वाले स्थायी प्रयासों को अपनाना हमारे लिए आवश्यक है। हमें पृथ्वी के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका को पहचानना होगा। पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक रूप से काम करके, हम सभी के लिए अधिक स्वस्थ और टिकाऊ दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें : 

वनों की कटाई, प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता जैसी मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरणीय क्षरण में योगदान करती हैं।

पर्यावरणीय क्षरण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जैसे वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी समस्याएं और दूषित जल स्रोतों से जलजनित रोग।

व्यक्ति ऊर्जा संरक्षण, अपशिष्ट को कम करने और रीसाइक्लिंग और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने जैसी स्थायी उपायों को करके अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम कर सकते हैं।

सरकारी नीतियां प्रदूषण को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए नियम और प्रोत्साहन निर्धारित करती हैं।

आशा है कि आपको इस ब्लाॅग में Paryavaran Aur Hum Essay in Hindi के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। इसी प्रकार के निबंध से जुड़े ब्लॉग्स पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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पर्यावरण संरक्षण पर निबंध (Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi)

पर्यावरण संरक्षण पर निबंध (Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi)

आज   हम पर्यावरण संरक्षण पर निबंध (Essay On Paryavaran Sanrakshan In Hindi) लिखेंगे। पर्यावरण संरक्षण पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

पर्यावरण संरक्षण पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Paryavaran Sanrakshan In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे , जिन्हे आप पढ़ सकते है।

पर्यावरण यानि ऐसा आवरण जो हमें चारों तरफ से ढंक कर रखता है, जो हमसे जुड़ा है और हम उससे जुड़े हैं और हम चाहें तो भी खुद को इससे अलग नहीं कर सकते हैं। प्रकृति और पर्यावरण एक दूसरे का अभिन्न हिस्सा हैं।

कोई भी व्यक्ति या वस्तु चाहे वो सजीव हो या निर्जीव, पर्यावरण के अन्तर्गत ही आती है। पर्यावरण से हमें बहुत कुछ मिलता है, लेकिन बदले में हम क्या करते हैं? हम अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए इस पर्यावरण और इसकी अमूल्य संपदा का हनन करने पर तुले हैं।

हमारे द्वारा कि गई हर अच्छी और बुरी गतिविधि का असर पर्यावरण पर पड़ता है। इस प्रकृति पर मानव ही सबसे अधिक बुद्धिशील प्राणी माना जाता है। अतः पर्यावरण के संरक्षण की जिम्मेदारी भी मनुष्य की ही है। आज हम पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालकर समाज को इसके लिए जागृत करना चाहते हैं।

पर्यावरण अर्थात् जिस वातावरण में हम रहते हैं। हमारे आस पास मौजूद हर एक चीज, जीव-जंतु, पक्षी, पेड़-पौधे, व्यक्ति इत्यादि सभी से मिलकर पर्यावरण की रचना होती है। हमारा इस पर्यावरण से घनिष्ठ संबंध है और हमेशा रहेगा। प्रकृति और पर्यावरण की अद्भुत सुंदरता देखते ही हृदय में खुशी और उत्साह का संचार होने लगता है।

हरे भरे लहलहाते पेड़, आसमान में कलरव करते और चहचहाते पक्षी, जंगल में दौड़ते जीव जंतु, समन्दर में आती और जाती हुई लहरें, कल कल करके बहती हुई नदियां आदि जो मनोरम अहसास करवाते हैं, वो हमें अन्य कहीं से महसूस नहीं हो सकता।

फिर भी ये अफ़सोस की बात है कि लोग आज भी इसके महत्व को समझ नहीं पाए हैं और इसे नुकसान पहुंचाते रहते हैं। वे यह नहीं जान पा रहे कि पर्यावरण की हानि करके वे अपने सर्वनाश को निमंत्रण दे रहे हैं।

आज मानव नए नए आविष्कार कर रहा है और खूब तरक्की कर रहा है, परन्तु उसका हर्जाना भुगत रहा है ये पर्यावरण और इसमें रहने वाले अबोध जीव। आज सभी को पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण करने के लिए जागरूक होना पड़ेगा, अन्यथा पर्यावरण के साथ सारी मानव जाति का भी विनाश हो जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता क्यों?

पर्यावरण ने मानव को अनंत काल से संसाधन प्रदान किए और मानव ने भी उनका भरपूर उपयोग किया। प्राचीन काल से लेकर अब तक जिस भी वस्तु की जरूरत हमें महसूस हुई, वो पर्यावरण से ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमें हासिल हुई है।

जैसे जैसे समय बीतता गया हमारी जरूरतें भी बढ़ती गई और इन जरूरतों को पूरा करने के लिए हम पर्यावरण के प्रति निर्दयता दिखाने लगे। हमने जनसंख्या वृद्धि पर पहले से रोक नहीं लगाई, जिससे लोगों को संसाधन कम पड़ने लगे और अत्यधिक रूप से पर्यावरण का विनाश होने लगा।

गांवों से लोग शहरों की ओर पलायन करने लगे, पेड़ पौधों और वनों का विनाश होने लगा, जीव जंतुओं को अपने फायदे के लिए मारा जाने लगा, हर तरफ प्रदूषण फैल गया। जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचा।

जिस प्रकृति ने हमें आश्रय दिया उसी को नष्ट करने पर तुल गए हम लोग और प्रकृति का संतुलन बिगड़ता चला गया। पर्यावरण प्रदूषण के बहुत से दुष्प्रभाव हैं जैसे अणु विस्फोट से रेडियोधर्मी पदार्थ निकलने से आनुवांशिक प्रभाव, ओजोन परत जो पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है उसका क्षरण, भूमि का कटाव, अत्यधिक ताप वृद्धि, हवा – पानी – परिवेश प्रदूषित होना, पेड़ पौधों का विनाश, नए नए रोग उत्पन्न होना इत्यादि कई बुरे प्रभाव हैं।

पर्यावरण संरक्षण का महत्व

प्राचीन काल से ही पर्यावरण का बहुत महत्व रहा है, वास्तव में प्रकृति का संरक्षण ही उसका पूजन है। हमारे भारत में पर्वत, नदियां, वायु, आग, ग्रह नक्षत्र, पेड़ पौधे आदि सभी से मानवीय संबंध जोड़े गए हैं।

वृक्षों को संतान स्वरूप और नदियों को मां स्वरूप माना गया है। हमारे ऋषि मुनियों को ज्ञात था कि मानव स्वभाव कैसा होता है, मानव अपने लालच में किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने प्रकृति के साथ मानवीय सम्बन्धों को विकसित किया।

वे जानते थे कि पर्यावरण ही पृथ्वी पर जीवन का आधार है। अतः उन्होंने अपने ग्रंथो में प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण की ही बात कही। वेदों में भी कहा गया है –

‘ॐ पूर्णभदः पूर्णामिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥’

अर्थात् हमें प्रकृति से उतना ही ग्रहण करना चाहिए, जितना की आवश्यक है। प्रकृति को पूर्णता से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हमारी माता और दादी इसी भावना से बिना पौधों को नुक़सान पहुंचाए तुलसी की पत्तियां तोड़ती हैं। कुछ ऐसा ही संदेश वेदों में भी दिया गया है।

आज कोई भी पर्यावरण के संरक्षण का महत्व नहीं समझ रहा है। निरंतर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिससे सारी पृथ्वी प्रदूषित हो रही है और मानव सभ्यता का अंत होने को है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सन् 1992 में ब्राजील में पृथ्वी सम्मेलन का आयोजन भी किया गया।

जिसमें 174 देश शामिल हुए। उसके बाद जोहान्सबर्ग में भी सन् 2002 में पृथ्वी सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसके अन्तर्गत सारे देशों को पर्यावरण संरक्षण करने के लिए उपाय समझाए गए।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय

पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें सर्वप्रथम इस धरती को प्रदूषण रहित करना होगा। जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रदूषण भी बढ़ता ही जा रहा है, जिसे नियंत्रण में लाना आवश्यक है तभी हमारे पर्यावरण का संरक्षण हो पाएगा।

मनुष्य दिन प्रतिदिन प्रगति करता जा रहा है और इस विकास के नाम पर प्रदूषण वृद्धि करता जा रहा है। ओजोन परत का क्षरण होने से धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है और ध्रुवों पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं। अतः पर्यावरण संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी बन जाता है।

सन् 1986 में भारत की संसद ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक अधिनियम बनाया जिसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम कहते हैं। जब मध्यप्रदेश स्थित भोपाल में गैस लीक की दुर्घटना हुई थी, तब इसे पारित किया गया था।

यह बहुत बड़ी ओद्यौगिक दुर्घटना थी, जिसमें करीब 2,259 लोग वहीं मारे गए और 500,000 से ज्यादा व्यक्ति मिथाइल आइसोसाइनेट नामक गैस की चपेट में आ गए थे। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पर्यावरण की सुरक्षा की ओर ध्यान देना, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के बारे में सोचना और पर्यावरण में सुधार लाने हेतु कानून बनाना था।

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। इसे रोकने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं।

  • फैक्ट्री और घरों से निकलने वाला गंदा पानी जो नदियों और समुद्र में निष्कासित किया जाता है उसे रोकना होगा। क्योंकि यही पानी पीने में, खेती बाड़ी में और दूसरे कार्यों में उपयोग में लाया जाता है। जिसके प्रदूषित होने से उपजाऊ ज़मीन भी धीरे धीरे बंजर हो जाती है और उस जमीन पर भी खाद्य पदार्थ उगाए जाते हैं, वह भी खाने पर शरीर को नुक़सान पहुंचाते हैं।
  • वायु प्रदूषण से भी निरंतर पर्यावरण दूषित ही हो रहा है। हमें वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए घर में उपयोग लाए जाने वाले लेटेक्स पेंट का प्रयोग बंद करना होगा।

पर्यावरण को सुरक्षित रखना उतना ही जरुरी है जितना हम अपने आप को रखते है। पर्यावरण से ही हमे वो सभी चीजे उपलभ्ध होती है, जिसका इस्तेमाल करके आज मानव जीवित है और आराम और सुखदायी जीवन व्यतीत कर रहा है।

पर्यावरण संरक्षण हमारा फर्ज है और इस जिम्मेदारी को हम सबको मिल कर निभाना चाहिए। हमे जितना हो सके उतना पर्यावरण को दूषित होने से बचाना चाहिए और प्रदुषण को रोकने के उपायों को अमल में लाना चाहिए।

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तो यह था पर्यावरण संरक्षण पर निबंध , आशा करता हूं कि पर्यावरण संरक्षण पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Paryavaran Sanrakshan) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है , तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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प्रदूषण पर निबंध 100, 150, 250 & 300 शब्दों में (10 lines Essay on Pollution in Hindi)

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प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) – प्रदूषण के प्रति जागरूक होना इन दिनों सभी छात्रों के लिए काफी अनिवार्य है। आने वाली पीढ़ियों के लिए दुनिया का एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए हर बच्चे को पता होना चाहिए कि मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण और प्रकृति पर कैसे प्रभाव छोड़ रही हैं। प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) यह विषय काफी महत्वपूर्ण है। और, स्कूली बच्चों को ‘ प्रदूषण निबंध पर (Pollution Essay in Hindi )’ सहजता से एक दिलचस्प निबंध लिखना सीखना चाहिए। नीचे एक नज़र डालें। 

प्रदूषण निबंध 10 पंक्तियाँ (Pollution Essay 10 Lines in Hindi)

  • 1) प्रदूषण प्राकृतिक संसाधनों में कुछ अवांछित तत्वों को मिलाने की क्रिया है।
  • 2) प्रदूषण के मुख्य प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण हैं।
  • 3) प्रकृति के साथ-साथ मानवीय गतिविधियाँ, दोनों प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।
  • 4) प्रदूषण के प्राकृतिक कारण बाढ़, जंगल की आग और ज्वालामुखी आदि हैं।
  • 5) प्रदूषण एक राष्ट्रीय नहीं बल्कि एक वैश्विक समस्या है।
  • 6) प्रदूषण को रोकने के लिए पुन: उपयोग, कम करना और पुनर्चक्रण सबसे अच्छे उपाय हैं।
  • 7) अम्ल वर्षा और ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण के परिणाम हैं।
  • 8) प्रदूषण हमेशा जानवरों और इंसानों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • 9) प्रदूषित हवा और पानी इंसानों और जानवरों में कई बीमारियों का कारण बनते हैं।
  • 10) हम पर्यावरण के अनुकूल संसाधनों और सौर पैनलों का उपयोग करके प्रदूषण को रोक सकते हैं।

प्रदूषण पर निबंध 100 शब्द (Pollution Essay 100 Words in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) प्रदूषण इन दिनों एक बड़ी समस्या बन गया है। तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण जिसमें हवा, पानी और मिट्टी शामिल है, प्रदूषित हो गया है। वनों की कटाई और औद्योगीकरण के कारण, हवा अत्यधिक प्रदूषित हो रही है, और इससे ग्लोबल वार्मिंग हो रही है। आज सभी जल स्रोत अत्यधिक प्रदूषित हैं। कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है। पटाखों, लाउडस्पीकरों आदि का प्रयोग। हमारी सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, हृदय की समस्याओं, फेफड़ों के कैंसर, हैजा, टाइफाइड, बहरापन आदि का कारण बनता है। प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। हमें इस मुद्दे को गंभीरता और गंभीरता से लेना होगा।

प्रदूषण पर निबंध 150 शब्द (Pollution essay 150 Words in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) – यह एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या है। जब पर्यावरण दूषित होता है तो प्रदूषण उत्पन्न होता है। पर्यावरण में तीन प्रमुख प्रकार के प्रदूषण हैं। मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण आदि।

प्रदूषण के कुछ प्रमुख कारण हैं, जैसे ईंधन वाहनों का अत्यधिक उपयोग, कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग।

प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को बहुत बुरी तरह प्रभावित करता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। वायु प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियां और फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं होती हैं। जल प्रदूषण जल को प्रदूषित करता है। ध्वनि प्रदूषण से बीपी की समस्या और सुनने की समस्या होती है। यह तनाव का कारण भी बनता है। मृदा प्रदूषण से फसलों के उत्पादन में कमी आती है, हमें इसे रोकना चाहिए। उत्पादन को भी बनाए रखने के द्वारा। औद्योगिक कचरे का उचित उपचार, वर्षा जल की आपूर्ति का भंडारण, प्लास्टिक उत्पादों को कम करना और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग करना।इस प्रकार के उपाय करके हम प्रदूषण पर भी नियंत्रण कर सकते हैं।

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प्रदूषण पर निबंध 250 शब्दों में – 300 शब्दों में (Essay on pollution in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) प्रदूषण कई अलग-अलग रूपों में होता है। यह पूरी दुनिया में एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है। हवा, जमीन, मिट्टी, पानी आदि में कोई भी अप्रिय और अप्रिय परिवर्तन। प्रदूषण में योगदान देता है। ये सभी परिवर्तन रासायनिक, जैविक या भौतिक परिवर्तनों के रूप में हो सकते हैं। प्रदूषण फैलाने वाले माध्यम को प्रदूषक कहते हैं।

दुनिया में प्रदूषण को रोकने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। भारत में पर्यावरण की सुरक्षा और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनाया गया कानून पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 है।

आइए हम विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों पर विस्तार से एक नज़र डालें:

वायु प्रदुषण

जब पूरा वातावरण आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के कारण निकलने वाली हानिकारक जहरीली गैसों से भर जाता है, तो इससे वायु और पूरा वातावरण प्रदूषित होता है। इससे वायु प्रदूषण होता है।

यह प्रदूषण का एक और प्रमुख रूप है जो प्रकृति के लिए बहुत विनाशकारी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पानी के प्राकृतिक स्रोत दिन-ब-दिन कम होते जा रहे हैं और इसने पानी को एक दुर्लभ वस्तु बना दिया है। दुर्भाग्य से, इन महत्वपूर्ण समय में भी, ये शेष जल स्रोत कई स्रोतों (जैसे औद्योगिक अपशिष्ट, कचरा निपटान आदि) से अशुद्धियों से दूषित हो रहे हैं, जो उन्हें मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त बनाता है।

कचरा प्रदूषण

जब लोग अपशिष्ट निपटान के उचित तंत्र का पालन नहीं करते हैं, तो इसका परिणाम कचरे का संचय होता है। यह बदले में कचरा प्रदूषण का कारण बनता है। इस समस्या का समाधान करने का एकमात्र साधन यह सुनिश्चित करना है कि अपशिष्ट निपटान के लिए एक उचित प्रणाली मौजूद है जो पर्यावरण को दूषित नहीं करती है।

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण के पीछे सामान्य कारण उद्योग, योजनाओं और अन्य स्रोतों से आने वाली ध्वनि है जो अनुमेय सीमा से अधिक तक पहुँचती है। स्वास्थ्य और शोर के बीच एक सीधा संबंध है जिसमें उच्च रक्तचाप, तनाव से संबंधित आवास, श्रवण हानि और भाषण हस्तक्षेप शामिल हैं।

Pollution Essay से सबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

Q.1 प्रदूषण के प्रभाव क्या हैं.

A.1 प्रदूषण अनिवार्य रूप से मानव जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। यह हमारे द्वारा पीने वाले पानी से लेकर हवा में सांस लेने तक लगभग सभी चीजों को खराब कर देता है। यह स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाता है।

प्रश्न 2 प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है?

उ.2 हमें प्रदूषण कम करने के लिए व्यक्तिगत कदम उठाने चाहिए। लोगों को चाहिए कि वे अपने कचरे को सोच समझकर विघटित करें, उन्हें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। इसके अलावा, जो कुछ वे कर सकते हैं उसे हमेशा रीसायकल करना चाहिए और पृथ्वी को हरा-भरा बनाना चाहिए।

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